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भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, इन राज्यों का ऐलान

aaptak.news28@gmail.com March 6, 2026
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान किया है। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है। सीएम सिद्धारमैया ने बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उन पर गलत असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, इस बैन को किस तरह लागू किया जाएगा, इसकी तैयारी चल रही है और जल्द ही नियम बनाए जाएंगे।

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वहीं आंध्र प्रदेश सरकार भी 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी।

कॉलेज-विश्वविद्यालय में नशे पर सख्ती होगी
सिद्धारमैया ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बच्चों के स्वास्थ्य, उनके व्यक्तित्व और उनके भविष्य को बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार शैक्षणिक संस्थानों में नशे की समस्या को रोकने के लिए कदम उठाएगी। इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही सख्त नियम लागू किए जाएंगे ताकि छात्र नशे से दूर रहें। छात्रों की मदद के लिए सहायता और काउंसलिंग केंद्र भी बनाए जाएंगे, जहां वे अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें।

उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगी
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव डेटा सुरक्षा कानून डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (डीपीडीपी) और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा है। इसके तहत बच्चों को अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति और उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगी। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नवंबर 2024 में बैन लगाया
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नवंबर 2024 में ‘ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिलÓ पास किया था। इस कानून का मकसद बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट और साइबर जोखिमों से बचाना है। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को टिकटॉक, एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, यूट्यूब जैसी बड़ी सोशल मीडिया साइटों से दूर रखने का प्रावधान है। इन प्लेटफॉर्म्स को नाबालिग बच्चों के अकाउंट रिमूव करने और आयु सीमा की सख्त जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

भारत में नाबालिक सोशल मीडिया यूजर

भारत में सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले नाबालिगों (18 वर्ष से कम) की सटीक सरकारी संख्या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मेटा (मेटा) और गूगल जैसे बड़े प्लेटफॉर्म देश-वार आयु डेटा साझा नहीं करते हैं। हालांकि, विभिन्न हालिया रिपोर्ट और सर्वेक्षण इस स्थिति पर प्रकाश डालते हैं।

स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की पहुंच: ASER 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में 14 से 16 वर्ष की आयु के 76% बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।

नाबालिग जनसंख्या: भारत की लगभग 47.2 करोड़ (472 मिलियन) आबादी 18 वर्ष से कम आयु की है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अब डिजिटल रूप से सक्रिय है।

उपयोगकर्ता अनुपात: कुछ अनुमान बताते हैं कि भारत में कुल सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का लगभग 31% हिस्सा 13 से 19 वर्ष के किशोरों का है।

माता-पिता का फीडबैक: लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग हर दो में से एक माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चे सोशल मीडिया या गेमिंग के आदी (addicted) हो चुके हैं

भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर वर्तमान स्थिति और नए बदलाव ​किए गए हैं।

कर्नाटक में प्रतिबंध: 6 मार्च 2026 को कर्नाटक 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के राज्य बजट के दौरान इस ऐतिहासिक कदम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाना है।

राष्ट्रीय स्तर पर नियम (DPDP एक्ट 2025): केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम 2025 के तहत, 18 साल से कम उम्र के किसी भी ‘बच्चे’ का डेटा प्रोसेस करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को माता-पिता की सत्यापन योग्य सहमति (Verifiable Parental Consent) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रस्तावित बदलाव: भारत सरकार ऑस्ट्रेलिया के उस कानून का अध्ययन कर रही है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। ‘इकोनॉमिक सर्वे 2025-26’ में भी केंद्र सरकार को बच्चों के लिए उम्र-आधारित डिजिटल एक्सेस सीमाएं लागू करने की सिफारिश की गई है।

अन्य राज्यों की स्थिति: कर्नाटक की घोषणा के बाद, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्य भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं।

प्रमुख चुनौतियां और उद्देश्य:

उद्देश्य: मोबाइल की लत को कम करना, स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना और बच्चों को अश्लील या हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट से बचाना।

चुनौती: उम्र का सत्यापन (Age Verification) करना तकनीकी रूप से कठिन है, क्योंकि भारत में करोड़ों इंटरनेट यूजर्स हैं और कई बच्चे साझा उपकरणों का उपयोग करते हैं।

जेन जी से ​ज्यादा इंटेलिजेंट हैं मिलेनियल्स : रिसर्च

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