नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के साथ याददाश्त कम होना सीधे हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा हो सकता है? हम आम तौर पर मानते हैं कि याददाश्त कम होना उम्र बढ़ने का एक नॉर्मल हिस्सा है, लेकिन हाल की साइंटिफिक रिसर्च ने साबित किया है कि हमारे पेट और हमारे दिमाग में मौजूद बैक्टीरिया के बीच एक गहरा कनेक्शन है, जो सीधे हमारी याददाश्त पर असर डालता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर क्रिस्टोफ थीस और उनकी टीम ने यह समझने की कोशिश की कि कुछ लोग बुढ़ापे में भी दिमागी तौर पर तेज़ क्यों रहते हैं, जबकि दूसरों की याददाश्त 50 या 60 साल की उम्र में ही कम होने लगती है। मशहूर जर्नल “नेचर” में छपी यह स्टडी चूहों पर की गई थी।
स्टडी में एक हैरान करने वाली बात सामने आई। याददाश्त कम होना कोई पहले से तय प्रोसेस नहीं है। असल में, हमारा शरीर इसे एक्टिव रूप से रेगुलेट करता है, और हमारा पाचन तंत्र इस प्रोसेस में एक अहम भूमिका निभाता है।
इस प्रक्रिया को समझने के लिए अपने पेट के अंदर की गतिविधियों को समझना होगा। हमारी आंतों में नैचुरली विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहते हैं। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, इन बैक्टीरिया की बनावट बदल जाती है। कुछ हमारे लिए दूसरों की तुलना में ज्यादा फायदेमंद होते हैं।
डाइजेस्टिव सिस्टम में इम्यून सेल्स पेट में होने वाले इन बदलावों को तुरंत महसूस कर लेते हैं और शरीर में इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स शुरू कर देते हैं। यह इन्फ्लेमेशन हमारी वेगस नर्व्स के काम करने के तरीके में रुकावट डालती है। वेगस नर्व का मुख्य काम पेट से हिप्पोकैंपस (दिमाग का वह हिस्सा जो याददाश्त और ओरिएंटेशन के लिए जिम्मेदार होता है) तक सिग्नल भेजना है। जब ये सिग्नल दिमाग तक ठीक से नहीं पहुंचते हैं, तो याददाश्त कम होने लगती है।
इस स्टडी की सबसे जरूरी और पॉजिटिव बात यह है कि उम्र के साथ होने वाली यह याददाश्त की कमी ठीक की जा सकती है। एक एक्सपेरिमेंट में, जब वेगस नर्व, जो पेट से दिमाग तक सिग्नल भेजती है, को बूढ़े होते चूहों में स्टिम्युलेट किया गया और उनके पेट के माइक्रोबायोम की बनावट बदली गई, तो उनकी याददाश्त वापस आ गई। यह पेट के बैक्टीरिया को कंट्रोल करके उम्र से जुड़ी याददाश्त की समस्याओं को ठीक करने के एक नए तरीके के डेवलपमेंट में एक बड़ी कामयाबी है।
क्या है संबंध
खराब पेट (अस्वस्थ आंत/Gut) और कमजोर याददाश्त के बीच सीधा और गहरा संबंध है, जिसे वैज्ञानिक रूप से ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ (Gut-Brain Axis) कहा जाता है। आंतों में मौजूद बैक्टीरिया (Microbiome) का असंतुलन, सूजन (Inflammation) को बढ़ाकर सीधे दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त को प्रभावित करता है। यहां खराब पेट और कमजोर याददाश्त के बीच के संबंध के मुख्य कारण और प्रक्रियाएं हैं।
- गट-ब्रेन एक्सिस (The Gut-Brain Axis)
दूसरा दिमाग: पेट को “दूसरा दिमाग” माना जाता है, क्योंकि इसमें एंटरिक नर्वस सिस्टम होता है। आंत और दिमाग ‘वेगस नर्व’ (Vagus nerve) के माध्यम से लगातार एक-दूसरे से संवाद करते हैं।
सेरोटोनिन का उत्पादन: शरीर का लगभग 90% सेरोटोनिन (एक रसायन जो खुशी और मूड को नियंत्रित करता है) आंतों में बनता है। पेट खराब होने पर इसका उत्पादन कम हो जाता है, जिससे तनाव और याददाश्त में कमी आती है।
- पेट में सूजन और दिमागी असर (Inflammation)
खराब पेट = सूजन: जब पेट में ‘बैक्टीरियल असंतुलन’ होता है, तो पेट में सूजन (Gut inflammation) शुरू हो जाती है। यह सूजन शरीर में फैलकर दिमाग के उस हिस्से (हिप्पोकैम्पस) को प्रभावित करती है जो याददाश्त और सीखने के लिए जिम्मेदार है।
संकेतों में रुकावट: हाल के शोध के अनुसार, आंतों में बैक्टीरिया के असंतुलन से वेगस नर्व के माध्यम से दिमाग तक जाने वाले सिग्नल कमजोर हो जाते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होती है।
- कमजोर पाचन और पोषक तत्वों की कमी
पोषक तत्वों का अवशोषण: खराब पेट के कारण शरीर भोजन से पोषक तत्वों (जैसे विटामिन B12, मैग्नीशियम) को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है, जो दिमागी स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।
- तनाव और जंक फूड का असर
तनाव: लगातार तनाव पेट के बैक्टीरिया को बिगाड़ता है, जिससे पाचन खराब होता है और याददाश्त कमजोर होती है।
जंक फूड: अत्यधिक फैट और चीनी वाला खाना (जो पेट को खराब करता है) हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुँचाता है और याददाश्त कम करता है।
पेट और याददाश्त सुधारने के उपाय
प्रोबायोटिक्स लें: दही, छाछ, या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स का सेवन करें जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं।
फाइबर युक्त डाइट: फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन पेट को स्वस्थ रखते हैं।
चीनी कम करें: चीनी आंतों की परत को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसका सेवन कम करें।
