भोपाल। मध्य प्रदेश में घरेलू महिला हिंसा की स्थिति चिंताजनक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की ताजा रिर्पोट में मध्य प्रदेश की डरावनी तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 18 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा और वयस्कों में तंबाकू-शराब के सेवन की आदतें एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। इसका सीधा असर परिवार की महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में परिवार की सामाजिक स्थिति बिगड़ जाती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में महिलाओं के खिलाफ घरेलू और शारीरिक हिंसा के मामले लगातार बने हुए हैं। प्रदेश में 18-49 वर्ष की 28 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने अपने जीवन में कभी न कभी जीवनसाथी द्वारा की गई हिंसा का सामना किया है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा जहां 21.4 प्रतिशत है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 28.0 प्रतिशत तक है।
राज्य की 2.3 प्रतिशत महिलाओं को अपनी गर्भावस्था के दौरान भी शारीरिक हिंसा का शिकार होना पड़ा है। यह मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
18-29 वर्ष की 1.1 प्रतिशत युवा महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे 18 वर्ष की आयु से पहले ही यौन हिंसा का शिकार हो चुकी थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर शहरी क्षेत्रों (0.6 प्रतिशत) की तुलना में लगभग दोगुनी है।
नशे का बढ़ता चलन
व्यसनों के मामले में पुरुषों और महिलाओं दोनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के 46.4 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह लत बेहद व्यापक है जहां लगभग आधे से अधिक पुरुष इसके आदी हैं।
महिलाओं में भी तंबाकू की लत
राज्य की 10.3 प्रतिशत महिलाएं भी तंबाकू का सेवन करती हैं। 15 वर्ष से अधिक आयु के 17.0 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं। शहरों में शराब पीने वाले पुरुषों का प्रतिशत 18.5 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 17.0 प्रतिशत है। महिलाओं में शराब के सेवन की दर कुल 1.0 प्रतिशत दर्ज की गई है।
महिला सुरक्षा कानूनों को लेकर अभियान चलाने की जरूरत
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में अत्यधिक तंबाकू और शराब के सेवन का सीधा असर परिवारों की आर्थिक स्थिति और घरेलू हिंसा के रूप में सामने आता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और कानूनी जागरूकता की कमी के कारण घरेलू हिंसा के मामले शहरों से अधिक हैं। सरकार को ग्रामीण इलाकों में नशामुक्ति और महिला सुरक्षा कानूनों को लेकर विशेष अभियान चलाने की तत्काल आवश्यकता है।
