–आवाज उठाई तो माइंस ठेकेदार ने दी निकालने की धमकी
–सतना जिले के रामपुर बाघेलान तहसील का मामला, प्रशासन की अनदेखी
–श्रमिकों से नहीं श्रम विभाग का वास्ता, शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय
सतना। जिले की रामपुर बाघेलान तहसील अंतर्गत प्रिज्म जॉनसन सीमेंट प्रबंधन की माइंस में ट्रक ड्राइवरों के शोषण का मामला सामने आया है। यहां लाइम स्टोन परिवहन से जुड़े ठेकेदार द्वारा ट्रक ड्राइवरों से 8 घंटे की मजदूरी के नाम पर 12—12 घंटे तक अनवरत काम कराया जा रहा है। यही नहीं ट्रक ड्राइवरों को ओवरटाइम तो कराया जा रहा है, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया जा रहा है।
आलम यह है कि पुलिस और प्रशासन की अनदेखी के कारण यहां परिवहन ठेकेदार श्रम कानूनों को धता बताते हुए ट्रक ड्राइवरों और माइंस एरिया में कार्यरत अन्य श्रमिकों का जमकर शोषण कर रहे हैं। खास बात यह है कि खुद को श्रमिक हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि के कानों तक इन श्रमिकों की आवाज नहीं पहुंच रही है। शोषण का शिकार ट्रक ड्राइवरों और अन्य श्रमिकों का आरोप है कि वह पिछले 7 दिन से अधिक समय से शोषण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। हालांकि, मंगलवार 21 जुलाई को ट्रक ड्राइवरों की गुहार पर सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दरअसल, प्रिज्म जॉनसन प्रबंधन की बगहाई, सिजहटा माइंस में ‘गोयल कार्गो प्राइवेट लिमिटेड’ (Goel Cargo Pvt. Ltd.) नामक ठेकेदार लाइम स्टोन परिवहन का कार्य किया जाता है। उक्त ठेकेदार द्वारा माइंस से लाइम स्टोन प्रिज्म जॉनसन लिमिटेड मनकहरी प्लांट तक परिवहन किया जाता है। ऐसे में यह ठेकेदार ट्रक ड्राइवरों से 8 घंटे की बजाय 12—12 घंटे की ड्यूटी करवा रहा है। आवाज उठाने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। उचित मानदेय और वेतन को लेकर हक में आवाज उठा रहे ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि उक्त ठेकेदार द्वारा कई सालों से शोषण किया जा रहा है। उन्हें न तो पूरा वेतन मिल रहा है और न ही छुट्टियां दी जा रही हैं, जबकि ट्रक ड्राइवर जान जोखिम में डालकर माइंस एरिया से हैवी वाहनों से लाइम स्टोन का परिवहन कर कंपनी का कार्य करते हैं।
न ओवरटाइम का पैसा मिल रहा, न ही कोई सुविधाएं
हड़ताल में बैठे ट्रक ड्राइवरों का आरोप है कि उक्त ठेकेदार द्वारा न तो ओवर टाइम का पैसा दिया जा रहा है और न ही कोई सुविधाएं दी जा रही हैं। यहां तक कि उन्हें नियमित साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जाता, जबकि माइंस एरिया में लाइम स्टोन से लदे भारी ट्रक ले जाते समय हर जगह खतरा बना रहता है। उनका आरोप है कि इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाई जाती है तो ठेकेदार द्वारा काम से बाहर करने की धमकी दी जाती है।
ट्रक ड्राइवरों की मांगें
—माइंस एरिया में सिर्फ 8 घंटे के शिफ्ट में काम करवाया जाए।
—उचित मानदेय या वेतन दिया जाए।
—सभी ड्राइवरों और अन्य श्रमिकों से उचित व्यवहार किया जाए।
जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित ट्रक ड्राइवर, कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
हड़ताल में अड़े ट्रक ड्राइवरों ने मंगलवार को रामपुर बाघेलान तहसील में कलेक्टर की जनसुनवाई में गुहार लेकर पहुंचे। यहां कलेक्टर सतीश कुमार एस. ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। कलेक्टर ने कहा, कि वह इस मामले में जांच के बाद कार्रवाई करेंगे। कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि कल लेबर कमिश्नर को मौके पर भेजा जाएगा, उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहना है कानून
सीमेंट माइंस में कार्यरत श्रमिकों और ड्राइवरों को मिलने वाली सुविधाएं
सीमेंट माइंस में कार्यरत श्रमिकों और ड्राइवरों को नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
- न्यूनतम वेतनमान (Wage Code 2019 के अनुसार) केंद्र सरकार द्वारा खदान श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और परिवर्तनशील महंगाई भत्ता (VDA) तय किया गया है (कौशल और खदान में काम करने की जगह के आधार पर)
अकुशल (Unskilled): 556 से 693 रुपए प्रतिदिन
अर्ध-कुशल (Semi-Skilled): 693 से 827 रुपए प्रतिदिन
कुशल और लिपिक (Skilled/Clerical): 827 से 964 रुपए प्रतिदिन
अतिरिक्त सुविधाएं: ओवरटाइम (सामान्य दर से दोगुना) और वार्षिक बोनस (न्यूनतम 8.33%) अनिवार्य हैं।
- अनिवार्य सुविधाएं (OSH&WC Code 2020 के अनुसार)
माइंस और ट्रांसपोर्ट (ड्राइवरों) के लिए निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करना नियोक्ताओं (Principal Employer/Contractors) की जिम्मेदारी है।
कार्यस्थल पर सुविधाएं: पीने का शुद्ध पानी, अलग-अलग शौचालय, पर्याप्त प्रकाश/वेंटिलेशन, और विश्राम गृह (Shelters/Rest Rooms)।
सुरक्षा उपकरण (PPE): खदान के अनुसार सुरक्षा जूते, हेलमेट, चश्मा, डस्ट-मास्क और हाई-विजिबिलिटी जैकेट मुफ्त उपलब्ध कराना।
स्वास्थ्य और चिकित्सा: वार्षिक मुफ्त चिकित्सा जांच और खदान परिसर में प्रथम-उपचार (First-aid) कक्ष की व्यवस्था।
- सामाजिक सुरक्षा (Social Security Code 2020 के अनुसार)
सभी कर्मचारियों (चाहे वे नियमित हों या ठेके पर) को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं।
नियुक्ति पत्र: प्रत्येक कर्मचारी को कार्य पर रखने से पहले नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य है।
PF और ESI: 20 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी में पीएफ (PF) अनिवार्य है।
ESIC: खदान श्रमिकों के लिए कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) सुविधा उपलब्ध है।
ग्रेच्युटी (Gratuity): 5 वर्ष की निरंतर सेवा पर ग्रेच्युटी मिलती है (निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए 1 वर्ष)।
सीमेंट माइंस में कितने घंटे काम लिया जा सकता है
सीमेंट माइंस (खदानों) में ओवरटाइम वेतन और महिला कर्मचारियों के काम करने के नियम श्रम कानून (Mines Act, 1952) और नए लेबर कोड के तहत
- ओवरटाइम वेतन का नियम (Overtime Wages)
दोगुना भुगतान: खदान में तय समय (जमीन के ऊपर 9 घंटे और भूमिगत 8 घंटे) से अधिक काम करने पर सामान्य मजदूरी दर से दोगुनी (Twice/Double) दर से भुगतान करना अनिवार्य है।
उदाहरण: यदि किसी कर्मचारी की सामान्य मजदूरी 100 रुपए प्रति घंटा है, तो ओवरटाइम के दौरान उसे 200 रुपए प्रति घंटा मिलेंगे।
गणना का आधार: ओवरटाइम की गणना दैनिक या साप्ताहिक आधार पर की जाती है, जो भी कर्मचारी के लिए अधिक फायदेमंद हो।
नया नियम (अतिरिक्त समय): नए नियमों के तहत यदि शिफ्ट के बाद 15 से 30 मिनट तक भी अतिरिक्त काम किया जाता है, तो उसे आधा घंटा ओवरटाइम माना जाएगा।
- महिलाओं के लिए काम करने के नियम (Rules for Women Workers)
पहले महिलाओं के खदानों में काम करने पर कई पाबंदियां थीं, लेकिन श्रम मंत्रालय के हालिया सुधारों और महानिदेशालय (DGMS) के सर्कुलर के बाद नियमों को लचीला और सुरक्षित बनाया गया है।
ओपनकास्ट/जमीन के ऊपर माइंस (Above Ground): महिला कर्मचारी अब शाम 7:00 बजे से सुबह 6:00 बजे (नाइट शिफ्ट) के बीच भी काम कर सकती हैं। इसके लिए खदान प्रबंधन को उनकी लिखित सहमति, सुरक्षा (CCTV, महिला गार्ड), और परिवहन की पूरी व्यवस्था करनी होगी।
भूमिगत खदानें (Underground Mines): महिलाएं भूमिगत खदानों में भी काम कर सकती हैं, लेकिन केवल सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच। उन्हें केवल तकनीकी, पर्यवेक्षी (Supervisory) या प्रबंधकीय (Managerial) कार्यों के लिए ही भूमिगत भेजा जा सकता है, जहां लगातार मौजूद रहने की आवश्यकता न हो।
आराम का समय: महिलाओं की एक शिफ्ट खत्म होने और अगली शिफ्ट शुरू होने के बीच कम से कम 11 घंटे का अंतर (Rest Period) होना अनिवार्य है।
यहां कर सकते हैं शिकायत
यदि आपको उचित वेतन, पीएफ (PF), या सुरक्षा उपकरण नहीं मिल रहे हैं, तो आप ये कदम उठा सकते हैं।
आंतरिक शिकायत समिति (Grievance Redressal Committee)
नई श्रम संहिता के अनुसार, 20 या अधिक श्रमिकों वाले हर संस्थान में इस समिति का होना अनिवार्य है। आप अपनी समस्या सीधे इस समिति के पास लिखित में दर्ज करा सकते हैं।
श्रम आयुक्त कार्यालय (Labour Commissioner Office)
यदि कंपनी आपकी सुनवाई नहीं करती है, तो आप केंद्रीय श्रम आयुक्त (Central Labour Commissioner – CLC) कार्यालय में अपनी शिकायत जमा कर सकते हैं, क्योंकि माइंस (खदानें) केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
ऑनलाइन समाधान पोर्टल (SAMADHAN Portal)
आप भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ‘समाधान’ (SAMADHAN) पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके जरिए आपके वेतन या विवाद का निपटारा सरकारी अधिकारियों की देखरेख में होता है।
पीएफ और ईएसआई शिकायत
भविष्य निधि (PF) न मिलने पर आप ईपीएफओ (EPFO) के ‘आई-ग्रिवांस’ (EPFiGMS) पोर्टल पर सीधे नियोक्ता के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
