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NEET पेपर लीक विवाद पर घिरी सरकार, प्रधान ने दिया इस्तीफा

aaptak.co.in1@gmail.com July 25, 2026
neet paper leak resign dharmendra pradhan

NEET पेपर लीक विवाद के बीच सरकार पर बढ़ते दबाव के बाद प्रधान के इस्तीफे से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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नई दिल्ली। Neet Paper Leak Case: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने समेत सरकार के साथ सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया है। सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें थीं-केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर व कानूनी मामलों को वापस लेना और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देना।

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह एवं सीजेपी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका इस वार्ता में शामिल थे। बैठक के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, कॉकरोच जनता पार्टी सद्भावना के आधार पर आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। हमारी उम्मीद है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू करेगी। सीजेपी का यह आंदोलन 6 जून को शुरू हुआ था। सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा। उन्होंने कहा, हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं। सरकार ने इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है।

सौरव दास के मुताबिक, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी और उनकी प्रतियां भी संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई थीं, जिनकी प्रतियां तीन से चार दिनों के भीतर मिल जाएंगी। सीजेपी ने सरकार को एक ड्राफ्ट सौंपते हुए एफआईआर वापस लेने और भविष्य में किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगा था। सौरव दास ने कहा कि सरकार ने मंगलवार तक लिखित गारंटी देने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन वापस लेने का फैसला इन्हीं आश्वासनों के आधार पर लिया गया है।

शिक्षा सुधारों पर आगे की बात
वार्ता के दौरान सीजेपी ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर पांच सूत्रीय चार्टर भी सरकार को सौंपा। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार इस चार्टर का अध्ययन करेगी और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे भी चर्चा जारी रखेगी। उन्होंने कहा, आपने शिक्षा सुधारों को लेकर जो चार्टर दिया है, उसका अध्ययन किया जाएगा और आपके प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत भी होगी। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा सुधारों के मुद्दे पर करीब चार सप्ताह बाद सरकार और सीजेपी के बीच अगली बैठक हो सकती है।

मुआवजे पर भी बन गई सहमति
सीजेपी ने नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग भी उठाई थी। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने नियमों के तहत पीडि़त परिवारों को अधिकतम संभव सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति जताई है। सौरव दास ने भी कहा, सरकार ने नीट से जुड़े आत्महत्या के मामलों में पीडि़त परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। सरकार की ओर से प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और बाकी मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। हालांकि, सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा तय समयसीमा में सभी वादे पूरे किए जाने की उम्मीद के साथ ही वे आंदोलन समाप्त करने का फैसला ले रहे हैं।

दुनिया झुकती है, झुकाने वाला चाहिए: दीपके
पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही सीजेपी में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जबर्दस्त उत्साह दिखा। पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा-वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। 2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टूÓ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीडऩ के आरोप लगे थे।

अकबर के बाद अब प्रधान, 8 साल में दूसरी बार विवाद पर इस्तीफा
नीट पेपर लीक विवाद पर आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन यह अपने आप में दुर्लभ घटना है जब विवाद के कारण मोदी सरकार में किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया हो। इससे पहले 17 अक्टूबर, 2018 में विवाद की वजह से ही एमजे अकबर को विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक के खिलाफ कॉककोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों की बड़ी जीत है, जिसका केंद्र दिल्ली का जंतर-मंतर था। सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को मानने का भरोसा दिया था। उसमें, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और इस हफ्ते की शुरुआत में संसद तक मार्च में शामिल लोगों को खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना। फिर भी प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। इधर, सीजेपी ने इस्तीफे को बातचीत के अगले दौर के लिए एक शर्त भी बना दिया था, जो आज है।

धर्मेंद्र प्रधान ने ली पेपर लीक की जिम्मेदारी
इस्तीफा देने के बाद, प्रधान ने कहा कि उन्होंने नीट पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की। धर्मेंद्र प्रधान में एक्स पर पोस्ट में लिखा, जंतर-मंतर और पूरे देश की स्थिति को देखते हुए, जिसका मकसद देश-विरोधी ताकतों को इनका फायदा उठाने से रोकना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखाना, यह सुनिश्चित करना कि किसी भी भारतीय छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, और हमारे बच्चों को अपनी पढ़ाई पर समय देने और अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने देना है। मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। देर शाम शिक्षा मंत्रालय का चार्ज प्रहृलाद जोशी को सौंपा गया है।

प्रधान करप्शन का सिंबल, उन्हें जाना ही था: राहुल
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा-प्रधान को तो जाना ही था। अच्छा है चला गया। वो भ्रष्टाचार का सिंबल है। उसने देश के एजुकेशन सिस्टम को खोखला कर दिया। मेरी तरफ से छात्रों को जो सपोर्ट चाहिए हम तैयार हैं। हम छात्रों और उनके भविष्य को बचाने के लिए खड़े हैं। राहुल ने कहा-हमारा शिक्षा सिस्टम, जिसे कभी दुनिया भर में अच्छा माना जाता था, उस पर हमले हो रहे हैं, उस पर कब्जा किया जा रहा है। उसका निजीकरण किया जा रहा है। इसमें जितनी गलती पीएम की है। उतनी ही आरएसएस की है। राहुल ने कहा-छात्रों पर हुई हिंसा के लिए अमित शाह सीधे जिम्मेदार हैं। छात्रों पर चलाई गई पैलेट गन के लिए जिम्मेदार हैं। हम यह नहीं स्वीकार कर सकते कि पुलिस छात्रों पर इस तरह का एक्शन ले।

पेपर लीक पर बिल लाएगी सरकार, 10 करोड़ का जुर्माना, 10 साल की जेल
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की बढ़ती घटनाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सोमवार को संसद में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026Ó पेश कर सकती है। इस नए ड्राफ्ट बिल में दोषियों के लिए बेहद कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पेपर लीक या परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अब कानून और भी सख्त होगा। सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट बिल में ऐसे व्यक्तियों के लिए न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 5 साल और अधिकतम सजा को 10 साल करने का प्रस्ताव है। साथ ही, उन पर 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

संगठित अपराध पर 10 करोड़ तक का जुर्माना
अगर पेपर लीक किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो इसके परिणाम और भी भयंकर होंगे। नए संशोधन विधेयक में संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 7 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में शामिल गिरोहों या संस्थाओं पर 10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जाएगा, ताकि पेपर लीक माफियाओं की कमर तोड़ी जा सके। इस बिल का एक बड़ा पहलू यह है कि इसमें जांच प्रक्रियाओं को लटकाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन के तहत, यह अनिवार्य किया जा रहा है कि पेपर लीक के किसी भी मामले की जांच हर हाल में 2 महीने के भीतर पूरी कर ली जाए।

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