भोपाल। मप्र में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा अब गांवों से निकलकर सरकार और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने, ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रहने और बार-बार आपूर्ति बाधित होने की शिकायतों के बीच कई जिलों में ग्रामीणों ने प्रदर्शन, चक्काजाम और बिजली कंपनी के कार्यालयों का घेराव किया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि प्रदेश की कैबिनेट बैठक में भी मंत्रियों ने अधिकारियों से सवाल किए कि बिजली कटौती का असर मुख्य रूप से गांवों और कस्बों पर ही क्यों पड़ रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कई जिलों में सड़क पर उतरे ग्रामीण, कहीं चक्काजाम तो कहीं कार्यालयों का घेराव
जानकारी के मुताबिक, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, बैतूल, विदिशा और नर्मदापुरम सहित कई जिलों में बिजली कटौती के विरोध में प्रदर्शन हुए। कुछ गांवों में आठ से दस घंटे तक बिजली नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आईं।
भोपाल के आसपास 35 गांव प्रभावित
ईंटखेड़ी फीडर से जुड़े करीब 35 गांवों में शाम और रात के समय बिजली कटौती की शिकायतें सामने आईं। कुछ ग्रामीणों ने रातभर बिजली नहीं रहने की बात कही।
सीहोर में पांच दिन से कटौती की शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में शाम और रात के दौरान लंबे समय तक बिजली बंद रहने से ग्रामीण परेशान हैं। इछावर और जावर क्षेत्र में विरोध भी हुआ।
बैतूल और राजगढ़ में चक्काजाम
बैतूल के मोरडोंगरी में ग्रामीणों ने बैतूल-आमला मार्ग पर विरोध किया। राजगढ़ जिले में भी कई स्थानों पर बिजली कटौती के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन किए गए।
कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में बिजली संकट पर चर्चा हुई। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा सहित अन्य मंत्रियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती को लेकर चिंता जताई। मंत्रियों ने अधिकारियों से सवाल किया कि यदि बिजली की उपलब्धता की व्यवस्था की जा रही है, तो गांवों और कस्बों में ही कटौती क्यों हो रही है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भी दिन के समय बिजली कटौती की शिकायत का मुद्दा उठाया।
बैठक में ग्रामीणों की परेशानी का जिक्र करते हुए यह बात भी उठी कि किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत है। यदि तीन फेस बिजली उपलब्ध कराना संभव नहीं हो, तो कम से कम एक फेस पर लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
बिजली संकट के पीछे क्या हैं कारण?
ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में बिजली की मांग में करीब 4,000 मेगावाट की वृद्धि हुई है। कमजोर मानसून से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ, जबकि रबी की फसलों की बुवाई से पहले खेतों में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ गई। तापमान बढ़ने के कारण घरेलू बिजली की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई।
बिजली आपूर्ति पर दबाव
- बढ़ती मांग: कृषि और घरेलू उपयोग के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी।
- जलविद्युत उत्पादन पर असर: कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ।
- बिजलीघर में तकनीकी खराबी: बिरसिंहपुर बिजलीघर में खराबी से 600 मेगावाट उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी दी गई।
- बाहरी आपूर्ति में कमी: सरदार सरोवर से मिलने वाली बिजली की आपूर्ति भी कुछ समय प्रभावित रही।
सरकार ने अतिरिक्त बिजली जुटाने की तैयारी की
बिजली संकट से निपटने के लिए सरकार अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने और बंद उत्पादन इकाइयों को दोबारा चालू करने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, मणिखेड़ा और गांधीसागर जलाशयों से 101 मेगावाट तथा सिंगाजी बिजलीघर से 600 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। त्योहारों के दौरान बिजली की मांग पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली लेने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने त्योहारों के दौरान शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 15 अक्टूबर को आरोप लगाया कि कई गांवों में लगातार तीन से चार दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। उन्होंने बिजली बिलों, ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति और बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी को स्वीकार करते हुए कहा कि बारिश के पैटर्न में बदलाव और धान की रोपाई में देरी के कारण कुछ क्षेत्रों में मांग बढ़ी है। उनके अनुसार, दूसरे राज्यों से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की गई है और स्थिति एक-दो दिन में सामान्य होने की उम्मीद है।
किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों की बढ़ी परेशानी
अघोषित बिजली कटौती का असर केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार, लंबे समय तक बिजली बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज, छोटे कारोबार और त्योहारों की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं। रबी सीजन शुरू होने से पहले सिंचाई के लिए नियमित बिजली उपलब्ध कराना किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
अब आपूर्ति में सुधार पर टिकी निगाहें
प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी, मंत्रियों की शिकायतें और विपक्ष के सवाल सरकार के लिए मुसीबत बने हैं। सरकार ने अतिरिक्त बिजली जुटाने और आपूर्ति सुधारने के प्रयासों में जुटी है। हालांकि, नजरें इस पर टिकीं हैं कि घोषित व्यवस्थाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती कितनी कम होती है और किसानों को सिंचाई के लिए नियमित बिजली कब तक मिल पाती है।
मप्र में बिजली की मांग और आपूर्ति: वर्षवार आंकड़े
मप्र में बिजली संकट को समझने के लिए हर साल की अधिकतम बिजली मांग (Peak Demand), उपलब्ध बिजली (Availability) और वास्तविक आपूर्ति (Supply/Consumption) की तुलना करना जरूरी है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बिजली की मांग कितनी बढ़ी और उपलब्ध उत्पादन व खरीद उस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी या नहीं।
ध्यान देने वाली बात है कि अधिकतम मांग (MW) और पूरे साल की बिजली खपत (MU या करोड़ यूनिट) अलग-अलग माप हैं। इनकी तुलना एक ही तालिका में बिना अंतर स्पष्ट किए नहीं करनी चाहिए।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और भारत सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश की वार्षिक बिजली आवश्यकता और आपूर्ति की स्थिति।
वित्तीय वर्ष बिजली की मांग (MU) बिजली की आपूर्ति (MU) कमी (MU)
2020–21 83,437 83,437 0
2021–22 86,501 86,455 46
2022–23 92,683 92,325 358
2023–24 99,301 99,150 151
2024–25 1,04,445 1,04,312 133
2025–26* 85,679 85,670 9
इकाई: MU = मिलियन यूनिट; 1 MU = 10 लाख यूनिट
स्रोत: भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के संसदीय उत्तर में उपलब्ध आंकड़े। *2025–26 के आंकड़े केवल जनवरी 2026 तक के हैं, पूरे वित्तीय वर्ष के नहीं।
वर्षवार अधिकतम बिजली मांग और आपूर्ति
वर्ष के दौरान किसी समय बिजली की सबसे अधिक जरूरत को अधिकतम मांग (Peak Demand) कहा जाता है। 2024–25 के लिए मध्य प्रदेश की स्थिति इस प्रकार रही।
विवरण आंकड़ा
अधिकतम बिजली मांग 19,371 MW
उस समय पूरी की गई मांग 19,183 MW
अधिकतम मांग में अंतर 188 MW
मांग पूरी नहीं होने का अनुपात लगभग 1%
स्रोत: CEA की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25।
इन आंकड़ों से क्या पता चलता है?
- 2020–21 से 2024–25 के बीच वार्षिक बिजली आवश्यकता 83,437 MU से बढ़कर 1,04,445 MU हो गई।
- 2022–23 में वार्षिक ऊर्जा की कमी 358 MU रही, जो इस तालिका में सबसे अधिक है।
- 2024–25 में वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता का लगभग पूरा हिस्सा पूरा किया गया, लेकिन अधिकतम मांग के समय 188 MW का अंतर दर्ज हुआ।
मप्र में बिजली कटौती के आंकड़े वर्षवार
2024 और 2025 में कितने दिन बिजली की कमी रही?
मप्र में बिजली कटौती का सटीक वर्षवार रिकॉर्ड और बिजली की मांग पूरी न हो पाने के आंकड़े अलग-अलग हैं।
गर्मियों में बिजली की कमी: वर्षवार तुलना
अवधि बिजली की कमी वाले दिन प्रमुख जानकारी
15 अप्रैल–15 जून 2024 6 दिन बिजली की मांग आपूर्ति से अधिक रही
15 अप्रैल–15 जून 2025 12 दिन कमी वाले दिनों की संख्या दोगुनी हुई
स्रोत: नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC) के आंकड़े
2025 में किन तारीखों पर बिजली की कमी दर्ज हुई?
उपलब्ध NLDC-आधारित रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की गर्मियों में निम्न तारीखों पर ऊर्जा की कमी दर्ज हुई।
तारीख बिजली की कमी
15 अप्रैल 2025 0.52 MU
16 अप्रैल 2025 1.18 MU
17 अप्रैल 2025 1.29 MU
21 अप्रैल 2025 3.69 MU
22 अप्रैल 2025 2.55 MU
23 अप्रैल 2025 3.08 MU
24 अप्रैल 2025 1.64 MU
मई 2025 में भी 12 से 16 मई के बीच पांच दिनों पर 0.16 से 0.88 MU तक की कमी दर्ज होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
