भोपाल। मध्य प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनी ने बिना तकनीकी और प्रशासनिक अनुमति के ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग का काम शुरू कराने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मामले में करेली वितरण केंद्र के प्रभारी कनिष्ठ अभियंता (JE) गोविंद नरवरिया को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, संबंधित ठेकेदार के खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 138 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार, करेली शहर वितरण केंद्र के अंतर्गत 200 केवीए क्षमता वाले वितरण ट्रांसफार्मर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए 28 अक्टूबर 2026 को आवेदन दिया गया था।
नियमानुसार ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के लिए पहले प्राक्कलन तैयार करना और सक्षम अधिकारियों से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति लेना जरूरी था। लेकिन यह प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 30 अक्टूबर को स्थानीय ठेकेदार ने क्रेन की मदद से ट्रांसफार्मर हटाने का काम शुरू कर दिया।
मौके पर पहुंची बिजली कंपनी की टीम
मामले की सूचना मिलने पर नरसिंहपुर के अधीक्षण अभियंता ने सहायक अभियंता करेली ए.के. दुबे को तत्काल मौके पर जांच के लिए भेजा। जांच के दौरान क्रेन की मदद से ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग का काम जारी मिला। अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर काम रुकवा दिया और ठेकेदार के उपकरण जब्त कर लिए। इस कार्रवाई के कारण ट्रांसफार्मर की अनधिकृत शिफ्टिंग नहीं हो सकी।
JE पर निलंबन की कार्रवाई, ठेकेदार के खिलाफ FIR
कार्यपालन अभियंता नरसिंहपुर की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बिजली कंपनी प्रबंधन ने करेली वितरण केंद्र में पदस्थ वरिष्ठ लाइन परिचारक एवं प्रभारी कनिष्ठ अभियंता गोविंद नरवरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
वहीं, संबंधित ठेकेदार के खिलाफ करेली पुलिस थाने में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 138 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
बिजली कंपनी ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े किसी भी कार्य के लिए निर्धारित तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
