नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को विपक्षी गठबंधन INDI ब्लॉक की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी जवाबी राजनीतिक मोर्चा खोल दिया। विपक्ष की रैली के समानांतर भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग स्थानों पर मार्च और सभाएं कर कांग्रेस तथा विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा। भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाया और कांग्रेस से उसके पुराने रिकॉर्ड पर जवाब मांगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रामलीला मैदान में विपक्ष, दूसरी तरफ भाजपा का मार्च
INDI ब्लॉक ने दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में रैली आयोजित की। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। गठबंधन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बताया। दूसरी ओर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका पक्ष है कि मतदाता सूची में दोहराव और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के लिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
दिल्ली में रेखा गुप्ता और हरदीप पुरी ने संभाला मोर्चा
भाजपा की ओर से दिल्ली में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकाली गई। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसद बांसुरी स्वराज, मनजिंदर सिंह सिरसा और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। पदयात्रा के दौरान नेताओं ने सिर पर काली पट्टी बांध रखी थी। भाजपा ने इसे 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए लोगों की स्मृति से जोड़ा।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक नवंबर, दो नवंबर और तीन नवंबर की तारीखें 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाती हैं। ऐसे समय में कांग्रेस की ओर से राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उसी राजनीतिक सोच को आगे बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा में नितिन नवीन का राहुल गांधी पर हमला
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरियाणा के रोहतक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में हिस्सा लिया। उन्होंने राहुल गांधी पर देश में अराजकता और अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया।
नवीन ने विपक्ष के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि देश में सरकार जनता के जनादेश से बनती है और उसे राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती। भाजपा ने इस अभियान के तहत फरीदाबाद में भी कार्यक्रम आयोजित किया। यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पदयात्रा का नेतृत्व किया।
प्रह्लाद जोशी बोले- सब कुछ डुप्लीकेट
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने INDI ब्लॉक के कार्यक्रम और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गठबंधन को ‘इंडी ब्लॉक’ बताते हुए तंज कसा कि इसका प्रधानमंत्री, स्पीकर और मंत्री भी मॉक होंगे।
जोशी ने कहा कि विपक्ष का यह पूरा कार्यक्रम राजनीतिक दिखावा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने भी विपक्ष की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री इसी मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात कह चुके हैं, तो विपक्ष को प्रतीकात्मक महाभियोग की जरूरत क्यों पड़ी? सिन्हा ने कांग्रेस के इतिहास और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए। उनके इन बयानों को भाजपा के राजनीतिक जवाबी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा के अन्य नेताओं ने भी विपक्ष को घेरा
भाजपा के अलग-अलग नेताओं ने भी विपक्ष की रैली पर सवाल उठाए।
- पंकज सिंह: भाजपा विधायक पंकज सिंह ने कहा कि राजनीतिक दल प्रदर्शन करते रहते हैं, लेकिन विपक्ष जिन मुद्दों को उठा रहा है, वे आम लोगों से जुड़े नहीं हैं।
- दानिश आजाद अंसारी: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ने INDI गठबंधन पर राजनीतिक हताशा में जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
- कीर्ति वर्धन सिंह: केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के जमावड़े कानून-व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
इधर, MP में भी भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी दिल्ली में राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी की। एक नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के सिलसिले में जबलपुर पहुंचे देवड़ा ने कहा कि देश की जनता पूरी तरह समझती है कि राहुल गांधी क्या कर रहे हैं।
विपक्ष और भाजपा के बीच आमने-सामने की राजनीतिक लड़ाई
दरअसल, एक नवंबर की राजनीतिक गतिविधियां केवल एक रैली तक सीमित नहीं रहीं। INDI ब्लॉक ने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की।
जवाब में भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अपने राजनीतिक कार्यक्रम के जरिए संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि उनका आंदोलन मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है।
इस बीच कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 1984 के दंगों की निंदा करते हुए भाजपा के सवालों पर पलटवार किया। उन्होंने पूछा कि केंद्र में 12 साल से सत्ता में रहने के बावजूद पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में भाजपा ने क्या किया है।
कुल मिलाकर, एक नवंबर को दिल्ली में विपक्ष और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच दो अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला। एक ओर विपक्ष ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के इतिहास और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को निशाने पर रखा। अब इस पूरे विवाद का केंद्र चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और 1984 के दंगों की जवाबदेही बन गया है।
