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जस्टिस वर्मा का इस्तीफा, इन जजों के खिलाफ भी आ चुका महाभियोग

aaptak.news28@gmail.com April 10, 2026
justic yashwant verma resign

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने शुक्रवार 10 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा, जिसमें उन्होंने “गहरी पीड़ा” के साथ तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की बात कही है।

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विवाद का कारण: यह मामला मार्च 2025 का है, जब दिल्ली में उनके सरकारी आवास पर आग लगने के दौरान भारी मात्रा में (कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये से अधिक) जले हुए और अधजले नोट बरामद हुए थे।

महाभियोग की प्रक्रिया: जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया चल रही थी। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित एक तीन सदस्यीय समिति इन आरोपों की जांच कर रही थी।

इस्तीफे का प्रभाव: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उनके इस्तीफे के साथ ही संसद में चल रही महाभियोग की प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाएगी।

जांच पर सवाल: उन्होंने जांच समिति को लिखे 13 पन्नों के पत्र में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि वह इस “अन्यायपूर्ण” प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

तबादला: कैश कांड के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से हटाकर उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया था, जहाँ उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया था।

क्या है महाभियोग प्रक्रिया

महाभियोग प्रक्रिया (Impeachment) एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा संसद राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय/उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों जैसे उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को संविधान उल्लंघन, कदाचार या अक्षमता के आधार पर उनके कार्यकाल से पहले पद से हटा सकती है। भारत में, राष्ट्रपति के लिए अनुच्छेद 61 और न्यायाधीशों के लिए अनुच्छेद 124(4) के तहत यह प्रक्रिया अपनाई जाती है।

प्रक्रिया: संसद के किसी भी सदन में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। राष्ट्रपति के लिए, प्रस्ताव लाने के लिए 14 दिन के नोटिस की आवश्यकता होती है। इसके बाद दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का दो-तिहाई) से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।

आधार: यह प्रक्रिया केवल गंभीर आरोपों जैसे संविधान का उल्लंघन, दुर्व्यवहार या अयोग्यता के आधार पर शुरू की जा सकती है।

परिणाम: प्रस्ताव पारित होने के बाद संबंधित पदाधिकारी को पद छोड़ना पड़ता है।

usage examples of महाभियोग प्रक्रिया (उदाहरण): भारत में अब तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चला है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी. रामास्वामी (1993) के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू की गई थी, हालांकि प्रस्ताव लोकसभा में पारित नहीं हो सका था।

synonyms of महाभियोग प्रक्रिया (पर्यायवाची/संबद्ध शब्द): इसे संवैधानिक पदच्युति, महाभियोग प्रस्ताव, या औपचारिक अभियोग (Formal Accusation) भी कहा जा सकता है।

सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभ

सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद मिलने वाले मुख्य लाभों में पेंशन, ग्रेच्युटी (अधिकतम 25 लाख रुपए तक), पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य योजनाएं (जैसे ESIC), प्रोविडेंट फंड (PF), और छुट्टी का नकदीकरण (Leave Encashment) शामिल हैं, जो वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करते हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद प्रमुख वित्तीय और गैर-वित्तीय लाभ

पेंशन (Pension): सरकारी कर्मचारियों को 10 वर्ष की सेवा के बाद अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिल सकता है, साथ ही परिवार के लिए फैमिली पेंशन का भी प्रावधान है।

ग्रेच्युटी (Gratuity): यह एकमुश्त राशि है, जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उनके सेवाकाल के दौरान दी जाती है, जो अब कई मामलों में 25 लाख रुपए तक हो सकती है।

प्रोविडेंट फंड (EPF/GPF): यह कर्मचारी की सेवा के दौरान जमा की गई बचत का एक बड़ा हिस्सा होता है जो सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त मिलता है।

छुट्टी का नकदीकरण (Leave Encashment): जमा की गई अउपयोगित छुट्टियों के बदले नकद भुगतान।

चिकित्सा लाभ (Medical Benefits): सरकारी व अन्य संस्थानों द्वारा पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य बीमा।

अन्य लाभ: गैर-नकद लाभ जैसे दंत चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, और कभी-कभी कानूनी सेवाएं भी मिल सकती हैं।

महाभियोग से हटाए गए जज अब तक

भारत के इतिहास में अब तक किसी भी जज को महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया द्वारा सफलतापूर्वक हटाया नहीं गया है। न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी, सौमित्र सेन और पी.डी. दिनाकरन जैसे जजों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन या तो उन्होंने प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस्तीफा दे दिया या संसद में प्रस्ताव विफल हो गया।

प्रमुख जज जिनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू हुई (लेकिन हटे नहीं)

न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी (1993): सुप्रीम कोर्ट के जज, जिनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा।

न्यायमूर्ति सौमित्र सेन (2011): कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज, जिन्हें राज्यसभा ने दोषी माना लेकिन लोकसभा में वोटिंग से पहले इस्तीफा दे दिया।

न्यायमूर्ति पी.डी. दिनाकरन (2011): सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, जिन्होंने महाभियोग की कार्यवाही शुरू होने से पहले इस्तीफा दे दिया।

न्यायमूर्ति एस.के. गांगेले (2015): मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जज, जिनके खिलाफ जांच समिति ने दुर्व्यवहार नहीं पाया।

न्यायमूर्ति सी.वी. नागार्जुन रेड्डी (2017): आंध्र प्रदेश और तेलंगाना उच्च न्यायालय, प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा (2018): सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई, महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति द्वारा खारिज कर दिया गया।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा (2026): दिल्ली/इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, जिनके आवास पर कैश मिलने के बाद महाभियोग की कार्यवाही के दौरान उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

CASH CASE: महाभियोग से बचने न्यायमूर्ति वर्मा के पास एकमात्र विकल्प

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा

जन्म: 6 जनवरी 1969, इलाहाबाद।

शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय (हंसराज कॉलेज) से बी.कॉम और रीवा विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश से एलएलबी।

करियर: 1992 में वकालत शुरू की। वे उत्तर प्रदेश के मुख्य स्थायी अधिवक्ता (Chief Standing Counsel) भी रहे।

जज के रूप में नियुक्ति: 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।

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