नई दिल्ली। दशकों से यह दावा किया जाता रहा है कि इंसान का फ्रंटल लोब 25 वर्ष की उम्र तक पूरी तरह विकसित हो जाता है। ब्रेन-इमेजिंग अध्ययनों के सीमित डाटा पर बनी यह मान्यता अब अधूरी मानी जा रही है। हालिया शोध से संकेत मिला है कि मस्तिष्क की वायरिंग, नेटवर्क दक्षता और संरचनात्मक संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव 30 की शुरुआती उम्र तक जारी रहते हैं। इसका अर्थ है कि 25 वर्ष मस्तिष्क परिपक्वता की अंतिम सीमा कभी था ही नहीं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!शोध के अनुसार फ्रंटल लोब को योजना बनाने, निर्णय लेने, निर्णय क्षमता, भावनात्मक नियंत्रण और सामाजिक व्यवहार जैसे उच्च-स्तरीय कार्यों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसी वजह से जब युवा आवेगपूर्ण व्यवहार करते हैं या अस्थिरता महसूस करते हैं, तो अक्सर कहा जाता है कि उनका फ्रंटल लोब अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है।
20 और 30 के शुरुआती उम्र के कई लोगों के लिए यह विचार सांत्वना देने वाला भी रहा है कि जीवन की उलझनों के पीछे आंशिक रूप से जैविक कारण हो सकते हैं। जब हम छोटे होते हैं, तो मस्तिष्क बहुत ज्यादा रास्ते बना लेता है जैसे हर सडक़ में गली बना दी जाए। उम्र बढऩे के साथ दिमाग तय करता है कि कौन-से रास्ते उपयोगी हैं और कौन-से नहीं। जो कम इस्तेमाल होते हैं, वे खत्म हो जाते हैं और जरूरी रास्ते चौड़े व मजबूत हो जाते हैं। यही प्रक्रिया न्यूरल प्रूनिंग कहलाती है। इसी कारण किशोरावस्था में सोचने का तरीका बदलता है।
न्यूरोप्लास्टिसिटी: बेहतर मस्तिष्क निर्माण की कुंजी
यदि 20 की उम्र तक मस्तिष्क निर्माणाधीन है, तो सवाल उठता है कि इस संरचना को बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है। इसका उत्तर न्यूरोप्लास्टिसिटी में निहित है, यानी मस्तिष्क की स्वयं को पुनर्गठित और पुनर्संरचित करने की क्षमता। हालांकि, मस्तिष्क जीवन भर परिवर्तनशील रहता है, लेकिन ९ से 32 वर्ष की अवधि संरचनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी गई है। शोध से पता चलता है कि उच्च-तीव्रता वाला एरोबिक व्यायाम, नई भाषाएं सीखना और शतरंज जैसे संज्ञानात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण शौक मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
परिपक्वता कोई जादुई स्विच नहीं
शोध से स्पष्ट होता है कि 25 या 32 वर्ष कोई जादुई सीमा नहीं है, जहां मस्तिष्क अचानक परिपक्व हो जाए। मस्तिष्क का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जो दशकों तक चलती है, इसलिए अभी दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हुआ, जैसी धारणा को सरल निष्कर्ष की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। जैविक विकास एक सतत निर्माण परियोजना की तरह है।
गलतियां करना स्वाभाविक है, लेकिन यह भी सच है कि जीवन के शुरुआती दशकों में लिए गए निर्णय और अपनाई गई आदतें मस्तिष्क की संरचना और दक्षता पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
