Skip to content
AapTak

AapTak

सच, बेहिचक

Primary Menu
  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
    • ENTERTANMENT
    • JOB
    • LIFESTYLE
  • Artical
Light/Dark Button
Live
  • NATIONAL

सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दी इच्छामृत्यु की अनुमति

aaptak.co.in1@gmail.com March 11, 2026
sc

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूथेनेशिया के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 31 साल के हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दी, जो 13 साल से कोमा में है। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट पर हैं।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

दरअसल, देश में यह इस तरह का पहला मामला है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने एम्स को हरीश का लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटाने का निर्देश दिया। यह प्रोसेस इस तरह से किया जाना चाहिए, जिससे मरीज की गरिमा बनी रहे। पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज को रोकना या वापस लेना, जिससे मरीज को नैचुरली मरने दिया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हरीश की मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा की यूथेनेशिया की अपील के बाद सुनाया। परिवार ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए अपनी प्रॉपर्टी बेच दी, लेकिन अब पैसे का बोझ बढ़ रहा है। वे अपने बेटे की तकलीफ भी नहीं देख सकते।

फैसले पर पिता अशोक ने कहा, “हम इसके लिए काफी समय से लड़ रहे हैं। कौन सा माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेगा? हम पिछले तीन साल से यह केस लड़ रहे हैं। अब उसे AIIMS ले जाया जाएगा। वह पंजाब यूनिवर्सिटी में टॉपर हुआ करता था।

हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद बिस्तर पर है हरीश

दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी से B.Tech की डिग्री कर रहे थे। 2013 में, वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गया। इस वजह से, उसका पूरा शरीर पैरालाइज हो गया और वह कोमा में चला गया। वह न तो बोल सकता है और न ही कुछ महसूस कर सकता है।

डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बताया, यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें मरीज पूरी तरह से एक फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर सपोर्ट पर निर्भर होता है। ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। 13 साल तक बिस्तर पर रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर या गहरे घाव हो गए हैं। उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।

यह कंडीशन हरीश के लिए बहुत दर्दनाक है। उसके परिवार के लिए उसे इस हालत में देखना बहुत मुश्किल रहा है। वेंटिलेटर, दवाइयों, नर्सिंग और देखभाल पर सालों के खर्च ने परिवार को आर्थिक रूप से तबाह कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिलक फैसला

जस्टिस पारदीवाला ने फैसला सुनाते हुए अमेरिकी धार्मिक नेता हेनरी वार्ड बीचर के शब्दों को कोट करते हुए कहा, “भगवान किसी इंसान से यह नहीं पूछते कि क्या वह जीवन स्वीकार करता है; उसे जान लेनी ही होगी।” उन्होंने विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक, “हेलेन” की लाइन “टू बी ऑर नॉट टू बी” का भी ज़िक्र किया और कहा कि कोर्ट को अक्सर ऐसे ही सवालों के मामले में “मरने के अधिकार” पर विचार करना पड़ता है।

लाइफ सपोर्ट हटाने का फैसला दो क्राइटेरिया पर आधारित हो

इंटरवेंशन मेडिकल ट्रीटमेंट के दायरे में आना चाहिए।
यह मरीज के सबसे अच्छे हित में होना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉक्टर का फर्ज मरीज का इलाज करना है, लेकिन यह फर्ज तब खत्म हो जाता है जब ठीक होने की कोई उम्मीद न हो।

इच्छामृत्यु पर कानून बनाए केंद्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु पर एक कानून बनाने पर विचार करने को भी कहा। अभी, भारत में, यह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के आधार पर ही मुमकिन है, जिसके लिए मरीज की हालत पर दो मेडिकल बोर्ड की राय जरूरी है।

यूथेनेशिया के दो तरीके…

पैसिव यूथेनेशिया: इस मामले में, मरीज का ट्रीटमेंट या लाइफ सपोर्ट, जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब, या दवा, रोक दिया जाता है, जिससे मरीज नैचुरली मर सकता है। इसमें डॉक्टर कोई नया काम नहीं करते, वे बस इलाज बंद कर देते हैं। मौत का कारण बीमारी ही रहती है।

एक्टिव यूथेनेशिया: इसमें डॉक्टर मरीज को मारने के लिए दवा या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। यह भारत में गैर-कानूनी है। अगर कोई जानबूझकर किसी मरीज को दवा देकर मारता है, तो इसे क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) के सेक्शन 107 के तहत मर्डर या इंडियन पीनल कोड के तहत असिस्टेड सुसाइड माना जाता है।

भारतीय में यूथेनेशिया पर क्या कानून है?

2005 में, कॉमन कॉज नाम के एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट में पैसिव यूथेनेशिया के अधिकार की मांग करते हुए एक पिटीशन फाइल की थी। 9 मार्च, 2018 को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की लीडरशिप वाली पांच जजों की बेंच ने यूथेनेशिया को लीगल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था, अगर किसी मरीज को कोई लाइलाज बीमारी है या वह वेजिटेटिव स्टेट में है, यानी सिर्फ लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जिंदा है, तो नैचुरल मौत पक्का करने के लिए इलाज रोका जा सकता है। इसे यूथेनेशिया नहीं, बल्कि मरने का अधिकार माना जाएगा। सम्मान के साथ। यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 का हिस्सा है, जिसमें सम्मान के साथ जीने और सम्मान के साथ मरने का अधिकार शामिल है।

किन—किन देशों में है इच्छामृत्यु का कानून

दुनिया के कई देशों में इच्छामृत्यु (Euthanasia) और सहायता प्राप्त आत्महत्या (Assisted Suicide) के अलग-अलग कानून हैं। नीदरलैंड 2002 में इच्छामृत्यु को पूरी तरह वैध बनाने वाला दुनिया का पहला देश था।

सक्रिय इच्छामृत्यु और सहायता प्राप्त आत्महत्या वाले देश

इन देशों में डॉक्टर सीधे तौर पर जीवन समाप्त करने वाली दवा दे सकते हैं या मरीज को खुद ऐसा करने के लिए दवा प्रदान कर सकते हैं।

नीदरलैंड (Netherlands): 2002 से वैध। यहां बच्चों (नियमों के तहत) के लिए भी प्रावधान हैं।

बेल्जियम (Belgium): 2002 से वैध। यहां मानसिक पीड़ा के आधार पर भी अनुमति मिल सकती है।

लक्जमबर्ग (Luxembourg): 2009 से इच्छामृत्यु और सहायता प्राप्त आत्महत्या दोनों वैध हैं।

कनाडा (Canada): 2016 से ‘मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग’ (MAiD) के तहत वैध।

स्पेन (Spain): 2021 में कानून पारित कर इसे वैध बनाया गया।

कोलंबिया (Colombia): 1997 के अदालती फैसले के बाद से यहां सक्रिय इच्छामृत्यु वैध है।

न्यूजीलैंड (New Zealand): 2020 के जनमत संग्रह के बाद 2021 से लागू।

पुर्तगाल (Portugal): 2023 में कानून को मंजूरी दी गई, जो केवल लाइलाज बीमारी वाले वयस्कों पर लागू होता है।

इक्वाडोर (Ecuador): 2024 में संवैधानिक अदालत ने इसे वैध घोषित किया।

केवल सहायता प्राप्त आत्महत्या (Assisted Suicide) वाले देश
यहां डॉक्टर मरीज को दवा लिख सकते हैं, लेकिन उसे मरीज को खुद लेना होता है।

स्विट्जरलैंड (Switzerland): यहाँ 1942 से सहायता प्राप्त आत्महत्या वैध है, लेकिन सक्रिय इच्छामृत्यु (डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन देना) वर्जित है।

ऑस्ट्रिया (Austria): 2022 से गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए सहायता प्राप्त आत्महत्या को वैध बनाया गया।

जर्मनी (Germany): 2020 के अदालती आदेश के बाद सहायता प्राप्त आत्महत्या को कानूनी माना गया है।

विशेष क्षेत्राधिकार

ऑस्ट्रेलिया: विक्टोरिया, न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड सहित सभी छह राज्यों में अलग-अलग शर्तों के साथ यह वैध है।

अमेरिका: ओरेगन, वॉशिंगटन, कैलिफोर्निया और कोलोराडो सहित करीब 11 राज्यों में ‘मेडिकल सहायता से मृत्यु’ वैध है, लेकिन सक्रिय इच्छामृत्यु संघीय स्तर पर अवैध है।

भारत में स्थिति
भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia) अवैध है। हालांकि, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) और ‘लिविंग विल’ (Living Will) को कानूनी मान्यता दी है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति लाइलाज बीमारी के कारण कोमा में है और ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है, तो उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद उसका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है।

About the Author

aaptak.co.in1@gmail.com

Administrator

Web News Portal

Visit Website View All Posts

Post navigation

Previous: T20 वर्ल्ड कप ICC रैंकिंग: अभिषेक नंबर 1, ईशान नंबर 2 बैट्समैन
Next: अमेरिका में रिलायंस लगाएगी रिफाइनरी प्लांट, $300-बिलियन की डील

Related Stories

india block railly in ramleela maidan delhi
  • NATIONAL

दिल्ली की ‘वोट चोरी’ रैली से दूरी, MP युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी सस्पेंड

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
Screenshot_2026-10-28-15-55-11-43_40deb401b9ffe8e1df2f1cc5ba480b12
  • NATIONAL

हरदीप का निर्विरोध राज्यसभा जाना तय, कांग्रेस की आपत्तियां खारिज

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
mohan cabinet 3 nov
  • NATIONAL

कैबिनेट: 23,288 करोड़ के कार्यों को मंजूरी, 15 नए सैटेलाइट टाउन बनेंगे

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
RSS Error: A feed could not be found at `https://mpinfo.org/RSSFeed/RSSFeed_News.xml`. Empty body.

Recent Posts

  • दिल्ली की ‘वोट चोरी’ रैली से दूरी, MP युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी सस्पेंड
  • हरदीप का निर्विरोध राज्यसभा जाना तय, कांग्रेस की आपत्तियां खारिज
  • कैबिनेट: 23,288 करोड़ के कार्यों को मंजूरी, 15 नए सैटेलाइट टाउन बनेंगे
  • सागर SP पद से हटाने के 4 दिन बाद IPS सुजानिया का इस्तीफा
  • मप्र में हरदीप पुरी को चुनौती, रदद हो सकता है निर्दलीय का पर्चा

Recent Comments

  1. साजिश से गिराई गई थी शेख हसीना की सरकार? - AapTak on PAK आतंकी समूह का दावा, हसीना को हटाने में JUD की भूमिका
  2. पाकिस्तान में बचे सिर्फ 1.7% हिंदू, 1941 में 14.6% थे अल्पसंख्यक - AapTak on US, UK कनाडा नहीं, जर्मनी—रूस में बढ़े भारतीय छात्र
  3. luckycapone-Radmity on 7 राज्यों में 10वीं—12वीं ​के लिए होगा एक समान बोर्ड
  4. twin-Roatomy on 7 राज्यों में 10वीं—12वीं ​के लिए होगा एक समान बोर्ड
  5. luckycapone-flitabs on 7 राज्यों में 10वीं—12वीं ​के लिए होगा एक समान बोर्ड

Archives

  • November 2026
  • October 2026
  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • December 2024
  • November 2026
  • October 2026
  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • December 2024

You may have missed

india block railly in ramleela maidan delhi
  • NATIONAL

दिल्ली की ‘वोट चोरी’ रैली से दूरी, MP युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी सस्पेंड

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
Screenshot_2026-10-28-15-55-11-43_40deb401b9ffe8e1df2f1cc5ba480b12
  • NATIONAL

हरदीप का निर्विरोध राज्यसभा जाना तय, कांग्रेस की आपत्तियां खारिज

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
mohan cabinet 3 nov
  • NATIONAL

कैबिनेट: 23,288 करोड़ के कार्यों को मंजूरी, 15 नए सैटेलाइट टाउन बनेंगे

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
Oplus_131072
  • POLITICS/ADMIN

सागर SP पद से हटाने के 4 दिन बाद IPS सुजानिया का इस्तीफा

aaptak.co.in1@gmail.com November 3, 2026
हमारे बारे में…
आपतक एक प्रमुख हिंदी न्यूज पोर्टल है। इसमें राजनीतिक—प्रशासनिक और एक्सक्लूसिव समाचारों को प्रमुखता दी जाती है। ट्रेंडिंग न्यूज, बिजनेस, रोजगार तथा तकनीक से जुड़ी अहम खबरों को भी महत्व दिया जाता है।

संपर्क:
संपादक: आर.बी. सिंह
मोबाइल: 9425168479
कार्यालय: Katara Hills Bhopal, MP

सत्ता और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त पत्रकारिता के लिए आप भी सहयोगी बन सकते हैं।
हमारी मदद कर सकते हैं...
9425168489@upi
Email_id: aaptak.news28@gmail.com

  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
  • Artical
  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
    • ENTERTANMENT
    • JOB
    • LIFESTYLE
  • Artical
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.