वॉशिंगटन। दुनियाभर के देशों में भारी—भरकम टैरिफ लगाने के बाद दुनिया में खलबली मचाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लोकप्रियता को तगड़ा झटका लगा है। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही सुर्खियों में रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से असहमत लोगों का आंकड़ा दो तिहाई से भी अधिक का आंकड़ा पार कर गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, 2026 की शुरुआत में अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है। मार्च 2026 तक, विभिन्न सर्वेक्षणों में उनकी अप्रूवल रेटिंग (सहमति दर) 36% से 45% के बीच बनी हुई है, जबकि असहमति दर (disapproval) 60% तक पहुंच गई है।
प्रमुख सर्वेक्षणों के आंकड़े (मार्च 2026)
विभिन्न पोलिंग एजेंसियों द्वारा जारी ताजा आंकड़े
पोलिंग एजेंसी अप्रूवल डिसअप्रूवल दिनांक (2026)
The Economist 38% 58% 9 मार्च
Reuters/Ipsos 39% 60% 1 मार्च
CNN/SSRS 36% 63% 10 मार्च
Fox News 43% 57% 2 मार्च
Rasmussen Reports 45% 54% 5 मार्च
लोकप्रियता घटने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों और सर्वेक्षणों ने इस गिरावट के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण बताए हैं।
महंगाई और आर्थिक चिंताएं: 40% तक जीवनयापन लागत (cost of living) बढ़ने और महंगाई के कारण जनता में असंतोष है।
ईरान के साथ तनाव: मध्य पूर्व में, विशेषकर ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने उनकी रेटिंग को प्रभावित किया है।
नीतियों पर असहमति: Pew Research Center के अनुसार, ट्रंप की योजनाओं और नीतियों के प्रति जनता का भरोसा 2026 में कम हुआ है।
चुनाव पूर्व वादे: कुछ रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख चुनावी वादों को पूरा न कर पाना भी लोकप्रियता कम होने का एक कारण बना है।
निष्कर्ष: हालांकि, कुछ पोल (जैसे रस्मुसेन) उन्हें अभी भी 45% के करीब दिखा रहे हैं, लेकिन अधिकांश एग्रीगेटर्स जैसे Nate Silver’s Silver Bulletin और RealClear Polling उनकी औसत रेटिंग को उनके दूसरे कार्यकाल के निचले स्तर (लगभग 41-43%) पर बता रहे हैं।
दुनिया में तेजी से बढ़ रहा ट्रंप का विरोध
मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (2025-2029) की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर में उनके खिलाफ विरोध और असंतोष में तेज वृद्धि देखी गई है। यह विरोध मुख्य रूप से उनके “अमेरिका फर्स्ट” (America First) के आक्रामक आर्थिक संरक्षणवाद, व्यापार टैरिफ, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में कमी के कारण हो रहा है
।
दुनिया भर में विरोध के प्रमुख कारण और क्षेत्र
व्यापार युद्ध और आर्थिक नीतियां: यूरोप, कनाडा, और चीन सहित कई देशों ने ट्रंप द्वारा घोषित कड़े आयात शुल्कों (tariffs) के कारण नाराजगी जताई है। यूरोपीय संघ के नेताओं ने इसे “बड़ी चोट” बताया है।
अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता में गिरावट: सर्वेक्षणों से पता चलता है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से दुनिया भर में, विशेष रूप से यूरोपीय देशों में, अमेरिका के प्रति विश्वास में भारी गिरावट आई है।
मध्य-पूर्व और ईरान संघर्ष: मार्च 2026 में ईरान के साथ संघर्ष को लेकर ट्रंप की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है, और कई देशों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।
यूरोप में व्यापक नापसंदगी: Ipsos के पोल के अनुसार, ब्रिटेन में लगभग दो-तिहाई (66%) लोग वर्तमान अमेरिकी प्रशासन को पसंद नहीं करते हैं।
ब्राजील और लैटिन अमेरिका: ब्राजील में भी ट्रंप की नीतियों के खिलाफ विरोध देखा गया है।

विरोध की गति
अमेरिका के भीतर: 2025 में, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले ही वर्ष में, 2017 की तुलना में 133% अधिक प्रदर्शन हुए (10,700 से अधिक), जो उनके खिलाफ असंतोष की गति को दर्शाता है।
वैश्विक मंच पर: विभिन्न देशों ने व्यापार नीतियों के खिलाफ “संयुक्त कार्यवाही” और “प्रतियुक्ति” (countermeasures) की तैयारी की है, जिसे ट्रंप की संरक्षणवादी नीति के खिलाफ एक प्रमुख वैश्विक चुनौती माना जा रहा है।
ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि उनकी नीतियां अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं, लेकिन आलोचकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उनकी नीतियों को वैश्विक अस्थिरता के लिए जिम्मेदार मान रहा है।
वैश्विक और घरेलू स्तर विरोध तेज
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (मार्च 2026 तक के घटनाक्रमों के अनुसार) में उनकी नीतियों के खिलाफ वैश्विक और घरेलू स्तर पर विरोध काफी तेज हो गया है। इस विरोध के मुख्य कारण ये हैं।
- आर्थिक और व्यापारिक नीतियां (टैरिफ वार)
ग्लोबल टैरिफ बम: ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% से 15% तक का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया है।
भारत के साथ तनाव: भारत को व्यापार रोकने की धमकी और 25% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के कारण संबंधों में खटास आई है। रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसद भी इस “टैरिफ युद्ध” से चिंतित हैं क्योंकि इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
यूरोपीय प्रतिक्रिया: यूरोपीय देशों में अमेरिका की छवि गिरी है और वे अब अमेरिका के बिना भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
- सैन्य संघर्ष और मध्य पूर्व तनाव
ईरान के साथ युद्ध की स्थिति: ट्रंप ने ईरान को “बिना शर्त सरेंडर” करने या “तबाह होने” की चेतावनी दी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आपूर्ति रोकने पर 20 गुना बड़ा हमला करने की धमकी दी है।
घटती लोकप्रियता: ईरान के साथ युद्ध की संभावनाओं के कारण ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिर रही है और उनके समर्थक भी विरोध में उतर आए हैं। मार्च 2026 के एक सर्वे के अनुसार, 57% मतदाता उनके प्रदर्शन से नाखुश हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ टकराव
संयुक्त राष्ट्र (UN) का विरोध: ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र को “किसी काम का नहीं” बताया और इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। उनके द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के बैकफायर करने की खबरें भी सामने आई हैं।
- घरेलू विरोध प्रदर्शन
सड़कों पर प्रदर्शन: अमेरिका के शिकागो और वाशिंगटन जैसे शहरों में “ट्रंप को अब जाना होगा” जैसे नारों के साथ बड़े पैमाने पर रैलियां हो रही हैं।
लोकतंत्र पर खतरा: प्रदर्शनकारी उनकी कार्यशैली को “तानाशाही” बता रहे हैं और संविधान की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं।
ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” और आक्रामक विदेश नीति ने न केवल विरोधियों बल्कि उनके अपने गठबंधन सहयोगियों और समर्थकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है।
