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नई दिल्ली। अच्छी नींद के लिए जरूरी नहीं कि हर दिन घंटों जिम में पसीना बहाया जाए। रोजाना थोड़ी देर की शारीरिक गतिविधि भी नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती है। टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन के शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने वाले युवा प्रतिभागियों में गहरी और आराम देने वाली नींद का संबंध बेहतर नींद पैटर्न से देखा गया। अध्ययन के निष्कर्षों के मुताबिक, रोजाना करीब 10 मिनट की मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि भी बेहतर नींद से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इसका समान लाभ मिले।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!क्या कहती है रिसर्च?
शोधकर्ताओं ने युवा वयस्कों की शारीरिक गतिविधियों और नींद से जुड़े आंकड़ों का कई महीनों तक अध्ययन किया। इसके लिए फिटनेस ट्रैकर से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में यह देखा गया कि लोग कितनी बार सक्रिय रहते हैं और उनकी नींद के पैटर्न में क्या संबंध दिखाई देता है।
रिसर्च में नियमित गतिविधि करने वाले प्रतिभागियों में गहरी नींद से जुड़े बेहतर संकेत देखने को मिले। हल्की गतिविधियां, जैसे पैदल चलना और लंबे समय तक बैठने के बीच उठकर चलना-फिरना भी लाभकारी आदतों के रूप में सामने आईं।
हालांकि, यह अध्ययन मुख्य रूप से संबंध दर्शाता है। इससे यह साबित नहीं होता कि केवल 10 मिनट की कसरत करने से हर व्यक्ति की गहरी नींद निश्चित रूप से बढ़ जाएगी।
गहरी नींद क्यों है जरूरी?
गहरी नींद शरीर और मस्तिष्क की रिकवरी में अहम भूमिका निभाती है। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद से याददाश्त, एकाग्रता, मनोदशा और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को सहारा मिलता है। इसके विपरीत, बार-बार नींद टूटने या पर्याप्त नींद न मिलने से दिन में थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, अधिकांश वयस्कों को रात में कम से कम सात घंटे की नींद की जरूरत होती है। केवल सोने के घंटों की संख्या ही नहीं, बल्कि नींद का लगातार और तरोताजा करने वाला होना भी महत्वपूर्ण है।
दिन में 10 मिनट में कौन-सी कसरत करें?
यदि आपके पास व्यायाम के लिए ज्यादा समय नहीं है, तो इन आसान गतिविधियों से शुरुआत कर सकते हैं।
- तेज चाल से पैदल चलना: अपनी क्षमता के अनुसार 10 मिनट तक ऐसी गति से चलें कि सांस सामान्य से कुछ तेज चले।
- हल्की स्ट्रेचिंग: गर्दन, कंधों, पीठ और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- सीढ़ियां चढ़ना: यदि स्वास्थ्य और संतुलन इसकी अनुमति देते हों, तो थोड़ी देर सीढ़ियां चढ़ सकते हैं।
- लंबे समय तक बैठने से बचें: काम के दौरान नियमित अंतराल पर उठकर कुछ कदम चलें।
- हल्की बॉडी-वेट एक्सरसाइज: अपनी क्षमता के अनुसार स्क्वाट या अन्य सरल व्यायाम करें।
शुरुआत में अपनी शारीरिक क्षमता के मुताबिक गतिविधि चुनें। यदि कोई पुरानी बीमारी, चोट या व्यायाम से जुड़ी परेशानी है, तो उपयुक्त गतिविधि के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
व्यायाम करने का सही समय क्या है?
नींद बेहतर करने के लिए दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। सुबह या शाम का समय अपनी दिनचर्या के अनुसार चुन सकते हैं। हालांकि, सोने के बिल्कुल पहले बहुत तेज व्यायाम करने से कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की सलाह है कि नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले व्यायाम करने से बचें।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
सिर्फ व्यायाम ही नहीं, रोजमर्रा की कुछ आदतें भी नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती हैं।
- रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
- सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाएं।
- दोपहर बाद और शाम को चाय, कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय सीमित रखें।
- सोने से पहले भारी भोजन करने से बचें।
- शयनकक्ष को शांत, आरामदायक और जरूरत के मुताबिक ठंडा रखें।
- दिन में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी लें और नियमित रूप से सक्रिय रहें।
ये आदतें अच्छी नींद की दिनचर्या बनाने में मदद कर सकती हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि नियमित रूप से नींद आने में परेशानी हो, रात में बार-बार आंख खुलती हो, पर्याप्त सोने के बावजूद दिनभर थकान बनी रहती हो या तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें। ऐसी समस्याओं के पीछे अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसे नींद संबंधी विकार भी हो सकते हैं।
निष्कर्ष
रोजाना 10 मिनट की कसरत स्वस्थ दिनचर्या की अच्छी शुरुआत हो सकती है। नियमित पैदल चलना, हल्का व्यायाम और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन गहरी नींद के लिए पर्याप्त सोने का समय, नियमित दिनचर्या और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
हर तीसरा व्यक्ति नींद की बीमारी से ग्रसित
नींद की बीमारी या विकारों (Sleep Disorders) से दुनिया भर की लगभग 30% आबादी ग्रसित है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, यह समस्या विभिन्न रूपों में दुनिया के करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है।
अनिद्रा (Insomnia) – नींद न आना
यह दुनिया में सबसे आम नींद का विकार है।
- वैश्विक प्रभाव: दुनिया भर में लगभग 30% से 45% वयस्क अपने जीवन में कभी न कभी अनिद्रा के लक्षणों का सामना करते हैं। वहीं लगभग 10% से 16% लोग दीर्घकालिक (Chronic) अनिद्रा से पीड़ित हैं, जो महीनों तक बनी रहती है।
- बुजुर्गों में: वैश्विक स्तर पर लगभग 25% बुजुर्ग इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) – सोते समय सांस रुकना
यह एक गंभीर बीमारी है जिसमें सोते समय पीड़ित की सांस बार-बार रुकती और चालू होती है।
- वैश्विक प्रभाव: दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ (1 बिलियन) वयस्क ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित हैं।
- अधूरी पहचान: एक चिंताजनक तथ्य यह है कि स्लीप एपनिया से पीड़ित लगभग 80% से 90% लोगों की बीमारी का निदान (Diagnosis) ही नहीं हो पाता और वे इसके साथ जीने को मजबूर हैं।
भारत में स्थिति
- भारत में भी स्थिति काफी गंभीर है, जहाँ लगभग 20% आबादी (26 करोड़ से अधिक लोग) नींद की किसी न किसी समस्या से जूझ रही है।
- एम्स (AIIMS) की एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में कामकाजी उम्र के करीब 10.4 करोड़ लोग अकेले स्लीप एपनिया का शिकार हैं।
मुख्य कारण और प्रभाव
आज के समय में युवाओं और बच्चों में भी यह बीमारी तेज़ी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण स्क्रीन टाइम का बढ़ना (ब्लू लाइट), पढ़ाई या नौकरी का तनाव और अनियमित जीवनशैली है। पर्याप्त नींद न मिलने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और यह हृदय रोग, हाई बीपी, डिप्रेशन और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।
