हेल्थ डेस्क। हालिया शोध और तकनीकी प्रगति के कारण अब ऐसे नए स्टूल (मल) टेस्ट उपलब्ध हैं जो 90% से अधिक सटीकता के साथ कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) का पता लगा सकते हैं। विशेष रूप से, यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा (UNIGE) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मशीन लर्निंग पद्धति विकसित की है जो लगभग 90% मामलों की पहचान करने में सफल रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!- यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा का AI आधारित स्टूल टेस्ट
यह नया टेस्ट आंतों के माइक्रोबायोटा (बैक्टीरिया) का उप-प्रजाति (subspecies) स्तर पर विश्लेषण करता है।
सटीकता: यह परीक्षण 90% सटीकता के साथ कैंसर का पता लगाने में सक्षम है, जो कि गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली कोलोनोस्कोपी के काफी करीब है।
विशेषता: यह एक गैर-आक्रामक (non-invasive) और किफायती विकल्प है, जो भविष्य में महंगी और असुविधाजनक कोलोनोस्कोपी की आवश्यकता को कम कर सकता है।
- Cologuard Plus (नेक्स्ट जेनरेशन टेस्ट)
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल ही में Cologuard Plus को मंजूरी दी है, जो पहले वाले टेस्ट का एक उन्नत संस्करण है।
सटीकता: इसके नैदानिक परीक्षणों (BLUE-C study) में कोलोरेक्टल कैंसर का पता लगाने के लिए 95% संवेदनशीलता (sensitivity) देखी गई है।
उपलब्धता: यह टेस्ट 2025 में व्यापक रूप से लॉन्च होने की उम्मीद है।
- ColoSense (Stool RNA Test)
FDA ने ColoSense नामक एक और स्टूल टेस्ट को मंजूरी दी है जो RNA मार्कर्स का उपयोग करता है।
सटीकता: यह 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में 93% सटीकता के साथ कैंसर का पता लगा सकता है।
स्टूल टेस्ट के प्रकार और उनकी क्षमता
टेस्ट का नाम तकनीक कैंसर का पता लगाने की दर मुख्य लाभ
यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा AI माइक्रोबायोम विश्लेषण ~90% सस्ता और सरल
Cologuard Plus स्टूल DNA + हीमोग्लोबिन 95% अत्यधिक सटीक, गैर-आक्रामक
ColoSense स्टूल RNA 93% जल्दी और प्रभावी पहचान
FIT (पारंपरिक) केवल रक्त की जांच ~79% घर पर करना आसान
महत्वपूर्ण सलाह: यदि स्टूल टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आता है, तो डॉक्टर आमतौर पर इसकी पुष्टि करने और कैंसर-पूर्व पॉलीप्स को हटाने के लिए कोलोनोस्कोपी करवाने की सलाह देते हैं।
