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प्रशासन के संरक्षण में ​प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की गुंडागर्दी, किसानों की जमीनों पर जबरन चलाया बुलडोजर

aaptak.co.in1@gmail.com May 3, 2026
badarkha mines prism action

—सतना जिले के बदरखा में बिना खरीदे किसानों की जमीन पर प्रशासन ने लगवाई खदान
—किसान हितैषी भाजपा सरकार में किसान बेबस, प्रिज्म प्रबंधन की गुंडागर्दी को प्रशासन का खुला संरक्षण
—पहले फसल खड़ी जमीन पर चलाया बुलडोजर और अब
लिया जबरन कब्जा

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सतना/भोपाल। सतना जिले के रामपुर बाघेलान तहसील अंतर्गत बदरखा गांव में प्रशासन के संरक्षण में प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की गुंडागर्दी ने किसानों की नींद उड़ा दी है। मनमाने दाम पर किसानों की बेशकीमती जमीन हथियाने के गोरखधंध में प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की साजिश में प्रशासन का खुला संरक्षण मिल रहा है। खुद को हिसान हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार के राज में किसान न्याय की गुहार में भटक रहा है। जिस पुलिस और प्रशासन पर आम जनता और किसानों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी है, वह खुद प्रिज्म जॉनसन सीमेंट प्रबंधन की गुंडागर्दी को खुला संरक्षण दे रहा है। यही वजह है कि गत दिवस 29 अप्रैल 2026 को प्रशासन के संरक्षण में भारी संख्या में तैनात पुलिस बल और राजस्व अमले की मौजूदगी में प्रिज्म प्रबंधन ने किसानों की जमीन पर जबरन बुलडोजर चलवा दिया। इस दौरान गांव के किसानों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की जबरन कार्रवाई के चलते किसान बेबस नजर आए। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान एक बच्चा घायल भी हो गया। मामले को दबाने के लिए प्रिज्म प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से उसका इलाज करवाकर मामले को रफा—दफा कर दिया।

रामपुर बाघेलान एसडीएम आरएन खरे, रामपुर बाघेलान थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी की मौजूदगी में बिना रजिस्ट्री और मुआवजा हुई इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसान बेबस और लाचार नजर आए। खुद को आम जनता और किसानों की हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार के राज में खुलेआम गुंडागर्दी और जबरन जमीन छीनने से किसानों के उस वकत आंसू निकल आए, जब उनकी खेती की जमीन पर बिना रजिस्ट्री प्रशासन के संरक्षण में बुलडोजर चलवाकर जबरन कब्जा लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन के संरक्षण में किसानों की बेशकीमती जमीन प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन हड़प रहा है। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

जानकारी के मुताबिक, प्रिज्म जॉनसन लिमिटेड द्वारा बदरखा में 40 हेक्टेयर निजी जमीन पर खनिज लीज मंजूर करवाई गई है। इसमें से करीब 15 हेक्टेयर जमीन मनमाने दाम पर खरीदकर प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन ने माइंस लगा रखी है। गांव की जमीन पर प्रचुर मात्रा में लाइम स्टोन होने के कारण प्रिज्म प्रबंधन मनमाने दाम पर किसानों की जमीन हथियाकर मुनाफा कमाने में जुटा है। बेशकीमती जमीन को मनमाने दाम पर खरीदे जाने के कारण गांव के अधिकतर किसान अपनी जमीन प्रिज्म प्रबंधन को देने को तैयार नहीं हैं। यही कारण कि गांव के ​अधिकतर किसान प्रिज्म प्रबंधन की इस जबरन गुडागर्दी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन किसानों की बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए प्रशासन का सहारा ले रहा है। जिला प्रशासन के नाम पर किसानों को डरा—धमकाकर उनसे जबरन जमीन छीनी जा रही है, जबकि इस जमीन की न तो रजिस्ट्री करवाई गई है और न ही किसानों को मुआवजा दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बुलडोजर कार्रवाई के पहले न तो कोई सूचना दी गई है और न ही उनसे कोई बातचीत की गई है। ऐसे में पुलिस—प्रशासन के संरक्षण में प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की मनमानी से किसानों को उनकी बेशकीमती जमीन छिनने का डर सता रहा है।

भाजपा राज में किसान बेबस
मप्र में पिछले दो दशक से अधिक समय से भाजपा की सरकार है। सरकार हमेशा किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन भाजपा के राज में किसानों पर खुला अत्याचार हो रहा है। किसान खुद को बेबस महसूस रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि भाजपा सरकार में किसानों को हक दिलाने के बजाय जबरन उनसे जमीन छीनने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि भाजपा सरकार में प्रशासन खुलकर किसानों को न्याय दिलाने के बजाय ऐसी कंपनियों को संरक्षण दे रहा है, जो किसानों का शोषण कर रहे हैं।

आधा सैकड़ा से अधिक किसानों की जमीन पर किया जबरन कब्जा
गांव में प्रिज्म प्रबंधन की गुंडागर्दी का आलम यह है कि यहां पर जबरन जमीन छीनी जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन के संरक्षण में प्रिज्म प्रबंधन ने इस कार्रवाई के दौरान आधा सैकड़ा से अधिक किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है। जबकि यह किसान बेशकीमती जमीन मनमाने दाम पर प्रिज्म प्रबंधन को देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन सिर्फ खेती की जमीन लेना चाहता है। ऐसे में वह आधी जमीन देकर अपने ही गांव में भूमिहीन हो जाएंगे। उनका कहना है कि प्रिज्म प्रबंधन पूरी जमीन उचित दर पर लेता है, तो किसान जमीन देने को तैयार हैं। लेकिन प्रिज्म प्रबंधन सिर्फ अपनी शर्तों पर किसानों से मनमाने दाम पर जमीन छीनने में जुटा है।

पहले भी खड़ी फसल पर चलवा चुके बुलडोजर
प्रशासन के संरक्षण में प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की किसानों पर बर्बरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले खरीफ सीजन में खेतों पर खड़ी धान की फसल पर भी प्रिज्म प्रबंधन ने बुलडोजर चलवाकर जमीन पर कब्जा कर लिया था। किसानों ने बताया कि प्रिज्म प्रबंधन की यह मनमानी कार्रवाई पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान किसानों की करीब 10 एकड़ से अधिक जमीन पर लगी धान की फसल को चौपट कर दिया गया था।

क्या बोले जिम्मेदार

कलेक्टर और एसडीएम साहब के आदेश पर थाना से पुलिस बल बदरखा में तैनात करवाया गया था, जहां तक एक बच्चे के घायल होने की बात है, वह बच्चा तार में फंस गया, उसे चोट आई है। उसका इलाज करवाया गया है।
—संदीप चतुर्वेदी, थाना प्रभारी, रामपुर बाघेलान

​उक्त किसानों की मुआवजा राशि ट्रेजरी में जमा करवा दी गई है।
—आरएन खरे, एसडीएम रामपुर बाघेलान

सीधी बात
—सतीश एस. कुमार, कलेक्टर सतना

सवाल: रामपुर बाघेलान तहसील के बदरखा गांव में किसानों की जमीन पर प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन को जबरन कब्जा दिलाया जा रहा है।?

जवाब: मप्र भू—राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत खनिज लीजधारी को शर्तों के तहत भू—प्रवेश की अनुमति दी जाती है। जहां तक बदरखा का मामला है। इस संबंध में मेरे से पहले पदस्थ कलेक्टर द्वारा अवार्ड पारित किया जाकर भू—प्रवेश की अनुमति दी गई थी। उसी के आधार पर कार्रवाई की गई है।

सवाल: प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन द्वारा पहले कई किसानों की जमीन की रजिस्ट्री और मुआवजा देने के बाद ही खदान लगाई गई है, लेकिन इस मामले में किसानों का कहना है कि बिना रजिस्ट्री और मुआवजा के जबरन कब्जा किया जा रहा है।?

जवाब : मप्र भू—राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत खनिज लीज स्वीकृत भूमि की रजिस्ट्री की जरूरत नहीं होती है। मुआवजा खाते में जमा करवा कर भू—प्रवेश दिया जा सकता है। बदरखा की जमीन पर खनिज लीज स्वीकृत है। चूंकि मध्य प्रदेश भू—राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत खनिज पर राज्य सरकार का स्वामित्व और अधिकार होता है, इसलिए खनिज के लिए सरफेस हटाकर खनिज तक पहुंच की अनुमति दी गई है।

सवाल: किसानों की बिना सहमति के जमीन अधिग्रहण की जा सकती है क्या?

जवाब: मप्र भू—राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत लीज स्वीकृत भूमि पर लीज स्वीकृत अवधि में भू—प्रवेश जरूरी है। इसी के तहत प्रशासन ने भू—प्रवेश की अनुमति दी है। इसके तहत भूमि का अधिकार हस्तांतरण नहीं होगा। वह जमीन वर्तमान में जिनके नाम पर है, उन्हीं के नाम पर रहेगी। सिर्फ खनिज तक पहुंच के लिए सरफेस पर यह कार्रवाई की गई है।

किसानों को तोहफा: अब, भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा

क्या है मप्र भू—राजस्व संहिता की धारा 247?

मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (MPLRC), 1959 की धारा 247 मुख्य रूप से खनिजों, खानों और खदानों पर राज्य सरकार के स्वामित्व और अधिकारों से संबंधित है।

इस धारा के मुख्य बिंदु
खनिजों पर सरकार का अधिकार: धारा 247(1) के अनुसार, जब तक किसी विशिष्ट अनुदान या अनुबंध में अलग से प्रावधान न हो, सभी खनिजों, खानों और खदानों के अधिकार राज्य सरकार के पास सुरक्षित होते हैं।

पहुंच और उपयोग का अधिकार: धारा 247(2) स्पष्ट करती है कि इन अधिकारों में खनन के उद्देश्य से भूमि तक पहुंचने, वहां कार्यालय बनाने, मशीनरी लगाने, खनिज भंडार बनाने और सड़कें या रेल लाइनें बनाने के लिए भूमि का उपयोग करने का अधिकार भी शामिल है।

अधिकारों का हस्तांतरण: धारा 247(3) के तहत, सरकार किसी अन्य व्यक्ति को भी खनन के अधिकार सौंप सकती है। हालांकि, ऐसा करने से पहले कलेक्टर को प्रभावित भूमि के स्वामियों को नोटिस देना और उनकी आपत्तियां सुनना अनिवार्य है।

क्षतिपूर्ति (Compensation): यदि खनन कार्यों से किसी व्यक्ति की भूमि या अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो धारा 247(4) के अनुसार, सरकार या पट्टाधारक को उस व्यक्ति को उचित मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा भूमि अर्जन अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार एसडीओ (SDO) द्वारा निर्धारित किया जाता है।

अवैध खनन पर दंड: धारा 247(7) के तहत, बिना वैध अनुमति के खनिज निकालने या हटाने पर कलेक्टर खनिज के बाजार मूल्य का दोगुना तक जुर्माना लगा सकता है। साथ ही, धारा 247(8) कलेक्टर को अवैध रूप से निकाले गए खनिजों को जब्त करने की शक्ति देती है।

कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य: धारा 247(5) के अनुसार, सरकार का कोई भी पट्टाधारक (assignee) कलेक्टर की पूर्व अनुमति और मुआवजे के भुगतान के बिना भूमि पर प्रवेश नहीं कर सकता।

प्रिज्म सीमेंट ‌प्रबंधन अवैध खनन का दोषी, किसान को 60 दिन के अंदर मुआवजा दिलाएं SDM: हाईकोर्ट

क्या कहता है नियम?
(विषय के जानकारों और विशेषज्ञों के अनुसार)

भारत में निजी सीमेंट प्लांट के लिए सीधे तौर पर जबरन (बिना सहमति के) जमीन का अधिग्रहण करना अत्यंत कठिन है और यह कानूनन गलत हो सकता है। ‘राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013’ (Land Acquisition Act 2013) के तहत निजी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के नियम बहुत सख्त हैं।

मुख्य नियम और स्थितियां

80% सहमति अनिवार्य: यदि निजी कंपनी के लिए सरकार जमीन अधिग्रहित कर रही है, तो प्रभावित परिवारों में से कम से कम 80% लोगों की लिखित सहमति अनिवार्य है।

सार्वजनिक उद्देश्य (Public Purpose): अगर सरकार किसी सीमेंट प्रोजेक्ट को “सार्वजनिक उद्देश्य” (जैसे- औद्योगिक विकास, अवसंरचना) के लिए अधिग्रहित करती है, तो नियम थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन तब भी मुआवजा और पुनर्वास (R&R) के कड़े नियम लागू होते हैं।

सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA): जमीन लेने से पहले सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करना आवश्यक है।

ग्रामीण बनाम शहरी मुआवजा: ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की बाजार दर से 4 गुना और शहरी क्षेत्रों में 2 गुना मुआवजा दिया जाना अनिवार्य है।

जबरन अधिग्रहण के खिलाफ कानूनी स्थिति:अगर किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं, तो वे ग्राम सभा या अदालत के माध्यम से इसका विरोध कर सकते हैं। अदालतों ने कई मामलों में निजी कंपनियों के लिए जबरन जमीन लेने की प्रक्रिया पर रोक लगाई है।हालांकि, कभी-कभी प्रशासनिक दबाव या गलत तरीकों (जैसे फर्जी वारिसाना, आदि) का उपयोग करने की खबरें आती हैं, जो अवैध हैं।

निष्कर्ष: निजी सीमेंट कंपनी सीधे तौर पर जमीन नहीं छीन सकती। जमीन का अधिग्रहण सरकारी प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है, जिसमें 80% लोगों की रजामंदी और उचित मुआवजा/पुनर्वास शामिल है।

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