भोपाल। दिल्ली में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े अंतरराज्यीय भुगतान विवाद के समाधान पर हुए समझौते को लेकर कांग्रेस ने मोहन सरकार पर बड़ा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चुनौती देते हुए कह, ‘मुख्यमंत्री जी, आप राजा हरिश्चंद्र नहीं हो कि जो कह देंगे, जनता उसे सच मान लेगी।Ó पटवारी ने सवाल किया कि जब मप्र ने सरदार सरोवर परियोजना में हुए नुकसान के आधार पर 7,669 करोड़ रुपए का दावा किया था, तो आखिर वह दावा क्यों छोड़ दिया गया। पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में चर्चा कराने की मांग की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राजधानी में निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि नर्मदा मप्र की जीवनरेखा है और सरदार सरोवर बांध बनने से सर्वाधिक नुकसान भी प्रदेश को ही हुआ। सबसे ज्यादा कृषि भूमि, वन क्षेत्र और आदिवासी परिवारों का विस्थापन मप्र में हुआ। पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी प्रदेश ने उठाया, इसलिए तत्कालीन गणना के आधार पर मप्र ने 7,669 करोड़ रुपए का दावा किया था। पटवारी ने आरोप लगाया कि अब सरकार इस दावे का कोई उल्लेख नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यह प्रचार कर रही है कि गुजरात की 1,500 करोड़ की देनदारी को 231 करोड़ रुपए में निपटाकर 1,268 करोड़ रुपए की बचत कर ली गई, लेकिन यह नहीं बता रही कि मप्र के हजारों करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ।
पटवारी ने कहा, मुख्यमंत्री जी यह बताएं कि किस कानूनी और वित्तीय आधार पर यह फैसला लिया गया। क्या इस पर कैबिनेट में चर्चा हुई? क्या विधानसभा में विपक्ष को विश्वास में लिया गया? क्या पर्यावरणविदों और विषय विशेषज्ञों से राय ली गई? पटवारी ने दावा किया कि दिल्ली जाते समय विमान में उनके साथ बैठक में शामिल होने जा रहे अधिकारी भी थे। अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि सरदार सरोवर से जुड़ी 7,500 करोड़ रुपए की देनदारियों को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, अब सरकार स्पष्ट करे कि इतना बड़ा दावा आखिर समाप्त कैसे हो गया। पटवारी ने कहा, प्रदेश की आर्थिक और मूलभूत समस्याओं को समझने की क्षमता सरकार में दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि ढाई साल में सरकार मप्र को समृद्ध बनाने का कोई स्पष्ट विजन पेश नहीं कर सकी है।
जीतू पटवारी के सरकार से सवाल
मप्र के 7,669 करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ?
मुख्यमंत्री ने किस आधार पर समझौते को मंजूरी दी?
क्या कैबिनेट और विधानसभा में इस पर चर्चा हुई?
चार राज्यों के बीच हुए समझौते की शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं?
सरकार पूरे मामले पर श्वेत पत्र कब लाएगी?
समझौते में क्या तय हुआ?
मप्र, महाराष्ट्र और राजस्थान, गुजरात को 550-550 करोड़ रुपए देंगे। तीनों राज्यों से गुजरात को 1,650 करोड़ मिलेंगे। केंद्र की मध्यस्थता में चारों राज्यों ने पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त करने पर सहमति बनाई। वर्षों से लंबित विवाद का स्थायी समाधान हो गया।
सर्वाधिक नुकसान मप्र को क्यों हुआ?
डूब क्षेत्र की कुल 37,533 हेक्टेयर जमीन में 55.5 फीसदी हिस्सा मप्र का है। 178 गांव जलमग्न हुए, बाद में संख्या बढ़कर 192 तक पहुंच गई। 2014 में बांध की ऊंचाई बढऩे से 5,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त जमीन डूब गई। बड़ी मात्रा में खेती की जमीन, जंगल और सरकारी ढांचे प्रभावित हुए।
मप्र पर 5.61 लाख करोड़ रुपए का कर्ज
पटवारी ने कहा कि राज्य पर 5.61 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार नए कर्ज लेकर प्रचार-प्रसार तथा सरकारी आयोजनों पर खर्च कर रही है। हाल ही में 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि सरकार सरदार सरोवर समझौते का पूरे दस्तावेज सार्वजनिक करे और बताए कि मप्र, गुजरात, महाराष्ट्र तथा राजस्थान के बीच किन शर्तों पर सहमति बनी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि मप्र का दावा उचित था तो उसे क्यों छोड़ा गया और यदि दावा उचित नहीं था तो पहले वह दावा किस आधार पर किया गया था।
सरदार सरोवर बांध—एक नजर
सरदार सरोवर बांध गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया (एकता नगर) में नर्मदा नदी पर बना एक विशाल कंक्रीट ग्रेविटी बांध है। यह भारत की सबसे बड़ी जल संसाधन परियोजनाओं में से एक है, जो चार प्रमुख राज्यों—गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को पानी और बिजली की आपूर्ति करती है।
महत्वपूर्ण आंकड़े और विशेषताएं
ऊंचाई (फाउंडेशन से): 163 मीटर (यह भारत का तीसरा सबसे ऊंचा कंक्रीट बांध है)।
लंबाई: 1210 मीटर।
कंक्रीट की मात्रा: कंक्रीट के आयतन के मामले में यह अमेरिका के ग्रैंड कौली बांध के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।
जल निकासी क्षमता: इसकी स्पिलवे क्षमता 30 लाख क्यूसेक (85,000 घन मीटर प्रति सेकंड) है, जो दुनिया में तीसरे नंबर पर है।
मुख्य नहर: इसकी मुख्य नहर 458 किमी लंबी (गुजरात में) है, जो आगे राजस्थान तक जाती है और दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई नहरों में गिनी जाती है।
बांध का इतिहास और हालिया घटनाक्रम
नींव: इस बांध की परिकल्पना सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1945 में की थी और इसकी आधारशिला 5 अप्रैल 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी।
विवाद और आंदोलन: विस्थापन, पर्यावरण और पुनर्वास के मुद्दों को लेकर मेधा पाटकर के नेतृत्व में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के कारण यह परियोजना दशकों तक विवादों और कानूनी अड़चनों में रही।
उद्घाटन: सभी बाधाओं को पार करने के बाद 17 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया।
हालिया समझौता (जुलाई 2026): नर्मदा जल नियंत्रण प्राधिकरण और संबंधित राज्यों के बीच बांध के बैकवाटर मुआवजे और डूब प्रभावित क्षेत्रों को लेकर चला आ रहा 39 साल पुराना विवाद सुलझ गया है। इसके तहत मध्य प्रदेश सरकार मुआवजे के निपटारे के लिए गुजरात को राशि का भुगतान करने पर सहमत हुई है।
राज्यों के बीच लाभ का बंटवारा
इस बहुउद्देशीय परियोजना से कुल 1,450 मेगावाट जलविद्युत (हाइड्रोपावर) का उत्पादन होता है। इसके लाभों का बंटवारा इस प्रकार है।
लाभ का प्रकार मप्र महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान
बिजली शेयर 57% 27% 16% 0%
सिंचाई व पानी नहीं नहीं 18 लाख हेक्टेयर रेगिस्तानी जिलों (जालौर, बाड़मेर)
पर्यटन का मुख्य केंद्र
सरदार सरोवर बांध के जलाशय के ठीक सामने नर्मदा नदी के बीच साधु बेट द्वीप पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) स्थित है। यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा है, जो दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। बांध और इस प्रतिमा के कारण यह पूरा क्षेत्र अब एक वैश्विक पर्यटन स्थल बन चुका है।
