भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर 24 बिंदुओं वाली नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें वर्दी में रील या फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से लेकर ChatGPT और अन्य AI प्लेटफॉर्म पर शासकीय, गोपनीय या संवेदनशील जानकारी अपलोड करने पर रोक लगाई गई है। गाइडलाइन 21 सितंबर 2026 को जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई गाइडलाइन में फेसबुक, WhatsApp, X, Instagram और YouTube समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुलिसकर्मियों के पोस्ट, फोटो, वीडियो, कमेंट और दस्तावेज साझा करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। नियम केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर जारी किए गए हैं।
वर्दी में रील बनाने पर कार्रवाई
नई व्यवस्था के मुताबिक पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में ऐसी सामग्री पोस्ट करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।
उल्लंघन की प्रकृति के अनुसार कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारी के साथ उसके नियंत्रण अधिकारी के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
ChatGPT और अन्य AI प्लेटफॉर्म पर सरकारी जानकारी नहीं
गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा AI टूल्स से संबंधित है। पुलिसकर्मियों को शासकीय, गोपनीय या सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील दस्तावेज और जानकारी ChatGPT, Gemini या अन्य AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसमें सरकारी दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा करने से भी रोकने की बात कही गई है।
जांच, गिरफ्तारी और छापेमारी की जानकारी साझा करने में सावधानी
पुलिसकर्मियों को गिरफ्तारी, छापेमारी और आपराधिक जांच से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसी जानकारी को आवश्यक तथ्यों तक सीमित रखना होगा। जांच की प्रक्रिया, आगे की कार्रवाई या ऐसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी, जिससे किसी मामले की जांच या अभियोजन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट करने से भी बचने को कहा गया है, जिससे किसी आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोषी मानने का संकेत मिले।
सरकारी नीतियों पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना होगा
गाइडलाइन के अनुसार पुलिसकर्मियों को अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से सरकारी नीतियों और योजनाओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचना होगा।
सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक या धार्मिक बयान देने तथा वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों की गरिमा प्रभावित करने वाली टिप्पणियों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
यदि किसी निजी पोस्ट से यह प्रतीत होता है कि पुलिसकर्मी सरकार का आधिकारिक पक्ष रख रहा है, तो विभाग की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है। गंभीर मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है।
संवेदनशील ड्यूटी और लोकेशन की जानकारी साझा नहीं होगी
संवेदनशील जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी की सटीक प्रकृति, कार्यस्थल और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया है।
संवेदनशील स्थानों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय लोकेशन और जियो-टैगिंग को लेकर भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी संसाधनों के निजी प्रचार पर रोक
गाइडलाइन में सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने या निजी प्रचार के लिए नहीं करने को कहा गया है।
पुलिस विभाग की सामूहिक उपलब्धियों को किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने से भी बचने के निर्देश हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट और मॉनेटाइजेशन पर भी नियम
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों को विभागीय CUG सिम का इस्तेमाल सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए नहीं करने को कहा गया है। बिना अनुमति सोशल मीडिया अकाउंट के मॉनेटाइजेशन और पेड प्रमोशन जैसे मामलों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और मीडिया संवाद से जुड़े विभागीय निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। मामले की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारी और उसके नियंत्रण अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
क्या है गाइडलाइन?
24 बिंदुओं वाली इस गाइडलाइन का मुख्य फोकस पुलिस की आधिकारिक जिम्मेदारियों और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखना, संवेदनशील सरकारी जानकारी की सुरक्षा करना और जांच से संबंधित सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार को रोकना है। साथ ही सरकारी संसाधनों और पुलिस की आधिकारिक पहचान के निजी प्रचार में इस्तेमाल को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
