-1800 लीटर अवैध शराब बरामद
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और पुलिस पर हमलों का मामला एक बार फिर गंभीर रूप में सामने आया है। देवास जिले में शराब तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। पुलिस टीम को मुखबिर से अवैध शराब की तस्करी की सूचना मिली थी। पुलिस ने ट्रक को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ने कथित तौर पर वाहन आगे बढ़ा दिया। इस घटना ने प्रदेश में शराब तस्करी के नेटवर्क और कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुई घटना?
जिले के खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी रविवार और सोमवार की दरमियानी रात अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस टीम के साथ कार्रवाई कर रहे थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से इंदौर के रास्ते गुजरात की तरफ अवैध शराब की बड़ी खेप ले जाई जा रही है।
देवास एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देश पर इस कार्रवाई के लिए पांच से अधिक विशेष पुलिस टीमें गठित की गई थीं। अलग-अलग स्थानों पर पुलिस की नाकेबंदी की गई थी। रात करीब 1:30 बजे इंदौर-बैतूल हाईवे पर संदिग्ध ट्रक दिखाई दिया।
थाना प्रभारी दिलीप पुरी ने ट्रक चालक को नीचे उतरने के लिए कहा। इसी दौरान चालक ने कथित तौर पर ट्रक को आगे बढ़ा दिया। घटनाक्रम में ट्रक का पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
साथी पुलिसकर्मी उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने करीब दो घंटे तक सीपीआर और अन्य उपचार के जरिए जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
ट्रक में मिली 1800 लीटर अवैध शराब
पुलिस की शुरुआती जांच में ट्रक से 208 पेटियों में करीब 1800 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
- वाहन: ट्रक, नंबर MP 43 H 4786 ( रिपोर्ट के अनुसार)।
- शराब: लगभग 1800 लीटर।
- पेटियां: 208।
- कार्रवाई: पांच से अधिक विशेष पुलिस टीमें।
- जांच: शराब तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने के लिए एसआईटी गठित।
- पुलिस अधिकारी: देवास एसपी आदित्य मिश्रा।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक चालक ट्रक को डिवाइडर पार कर संदलपुर की ओर ले गया और वाहन छोड़कर फरार हो गया।
दिलीप पुरी कौन थे?
दिलीप पुरी वर्ष 2007 बैच के सब-इंस्पेक्टर थे। वह धार जिले के निवासी थे। पुलिस सेवा के दौरान इंदौर और बड़वानी में भी पदस्थ रहे। बड़वानी जिले के सेंधवा में उन्होंने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की थी। सितंबर 2026 में उनका स्थानांतरण देवास जिले के खातेगांव थाने में थाना प्रभारी के रूप में हुआ था। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं।
मध्यप्रदेश में जहरीली शराब का मामला भी चर्चा में
देवास में टीआई की हत्या की घटना ऐसे समय हुई है, जब जिले के चंदाना और बिजाना गांवों में कथित जहरीली शराब से मौतों का मामला चर्चा में है। अक्टूबर 2026 में इन गांवों में कई लोगों की मौत के बाद अवैध शराब के कारोबार की जांच शुरू हुई थी। ग्रामीणों ने 13 से अधिक मौतों का दावा किया था, जबकि प्रशासन ने शुरुआती स्तर पर मौतों के अन्य कारण बताए थे।
पुलिस जांच में अवैध शराब की बिक्री से जुड़े नेटवर्क का पता चला और इस मामले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। इसके बाद देवास के कलेक्टर ऋतुराज और एसपी पुनीत गेहलोत का तबादला किया गया। तीन आबकारी अधिकारियों को भी निलंबित किया गया।
मध्यप्रदेश में शराब माफिया के हौंसले बुलंद, पहले भी हमले
मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार को रोकने के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमले पहले भी सामने आते रहे हैं।
2012 – मुरैना में IPS अधिकारी की हत्या
8 मार्च 2012 को मुरैना जिले के बानमोर में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह को अवैध खनन से जुड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था। वह अवैध पत्थर परिवहन रोकने की कोशिश कर रहे थे।
2016 – राजगढ़ में पुलिस अधिकारी पर फायरिंग
जून 2016 में राजगढ़ जिले में अवैध शराब ले जा रहे युवकों का पीछा कर रहे मालावर थाना प्रभारी अनिल रघुवंशी पर फायरिंग की गई। गोली उनके कंधे में लगी। एक आरोपी पकड़ा गया, जबकि गोली चलाने वाला फरार हो गया था।
2019 – जबलपुर में अवैध शराब परिवहन का मामला
19 सितंबर 2019 को जबलपुर जिले के पाटन में एएसआई टीकाराम प्रजापति को वाहन से अवैध शराब ले जाने की सूचना मिली। पुलिस ने वाहन रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक वाहन छोड़कर भाग गया। तलाशी में 1,674 बल्क लीटर देशी शराब बरामद हुई। यह न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज तस्करी का मामला है, अधिकारी पर हमले का नहीं।
2020 – टीकमगढ़ में पुलिसकर्मी से मारपीट
11 मई 2020 को शराब तस्करों को पकड़ने के बाद एएसआई मुतीन खान पर हमला और उनके अपहरण की कोशिश की गई। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
2020 – रायसेन में आबकारी टीम पर हमला
अक्टूबर 2020 में रायसेन के सांची थाना क्षेत्र के गुलगांव में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची आबकारी टीम पर हमला किया गया। वाहनों में तोड़फोड़ की गई और टीम को पीछे हटना पड़ा।
2021 – भोपाल के बैरसिया में पुलिस पर हमला
मई 2021 में बैरसिया क्षेत्र में अवैध शराब बनाने और बेचने के आरोपियों ने दो पुलिस कर्मचारियों पर हमला किया था। पुलिसकर्मी एक व्यक्ति की मौत की सूचना उसके परिवार को देने जा रहे थे।
2022 – धार में SDM और नायब तहसीलदार पर हमला
13 सितंबर 2022 को धार जिले के कुक्षी क्षेत्र में अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने पहुंचे SDM नवजीवन पंवार और नायब तहसीलदार राजेश भिड़े पर हमला किया गया। अधिकारियों के साथ मारपीट, फायरिंग और नायब तहसीलदार को अगवा करने की कोशिश की गई। ट्रक से लगभग 55 लाख रुपये की शराब बरामद होने की खबर आई थी।
2026 – देवास में TI दिलीप पुरी की मौत
2 नवंबर 2026 को खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने पहुंचे थे। ट्रक के पहिए से कुचलने के कारण उनकी मौत हो गई। वाहन से 208 पेटियों में लगभग 1800 लीटर शराब बरामद हुई। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
इस घटना से उठ रहे पांच बड़े सवाल
- प्रदेश में अवैध शराब की इतनी बड़ी खेप किन रास्तों से गुजर रही थी?
- हरदा से इंदौर होते हुए गुजरात तक शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है?
- 1800 लीटर शराब के परिवहन के पीछे किन कारोबारियों और तस्करों की भूमिका है?
- अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने वाली पुलिस टीमों की सुरक्षा के लिए क्या विशेष व्यवस्था है?
- देवास में जहरीली शराब के मामले के बाद भी अवैध शराब का परिवहन कैसे जारी रहा?
पुलिस जांच में अब क्या होगा?
इस मामले में एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल ट्रक चालक की भूमिका की जांच करना नहीं, बल्कि शराब की खेप के स्रोत, वास्तविक मालिक, परिवहन नेटवर्क और अंतिम डिलीवरी के ठिकाने का पता लगाना भी है।
पुलिस को ट्रक के दस्तावेज, मोबाइल कॉल डिटेल, जीपीएस और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच से नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हालांकि इन जांचों के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
देवास में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए केवल छापेमारी और जब्ती पर्याप्त है या इसके पीछे काम कर रहे संगठित नेटवर्क पर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। यह मामला अब सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की मौत तक सीमित नहीं है। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस तस्करी नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और उसके खिलाफ कितनी व्यापक कार्रवाई होती है।
