-अनुपूरक बजट समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर 2026 से शुरू होगा। पांच दिवसीय यह सत्र 11 दिसंबर तक चलेगा। विधानसभा सचिवालय ने 6 नवंबर को सत्र बुलाने संबंधी सूचना जारी कर दी है। इस सत्र में प्रश्नकाल, शासकीय कामकाज और विधायी कार्यों के साथ प्रदेश के वित्तीय मामलों पर भी चर्चा होगी।
सत्र ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब प्रदेश में खाद की उपलब्धता, बिजली कटौती, अवैध शराब कारोबार, कानून-व्यवस्था और सरकारी भर्तियों में नियुक्ति जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से गर्म हैं। विपक्ष इन विषयों पर सरकार से जवाब मांग सकता है।
सत्र में क्या होगा खास?
सत्र की कार्यसूची के अनुसार 7, 8, 9 और 10 दिसंबर को प्रश्नोत्तर तथा शासकीय कार्य निर्धारित हैं। 11 दिसंबर को भी प्रश्नोत्तर के बाद दोपहर 1:30 बजे तक शासकीय कार्य होंगे। इसके बाद अशासकीय कार्य लिए जाएंगे। सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किए जाने की संभावना है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि बजट की राशि और इसे पेश करने की अंतिम पुष्टि आधिकारिक कार्यसूची से ही होगी। पंचायत राज अधिनियम और कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव भी चर्चा में हैं। इनके अलावा विभागीय विधेयक और अन्य शासकीय प्रस्ताव सदन में रखे जा सकते हैं।
विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा?
- कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सामने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे हैं।
- अवैध शराब और जहरीली शराब: प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों और अवैध शराब के कारोबार का मुद्दा।
- देवास टीआई हत्याकांड: पुलिस निरीक्षक की मौत और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।
- खाद संकट: रबी सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण में आ रही परेशानियां।
- बिजली कटौती: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति तथा अघोषित कटौती।
- भर्ती और नियुक्तियां: चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलने का मामला।
- किसानों की समस्याएं: फसल, समर्थन मूल्य और कृषि संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन।
- इन मुद्दों पर विपक्ष के सवालों से सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
पिछले वर्षों में कितने दिन चली मध्यप्रदेश विधानसभा?
विधानसभा के कामकाज का आकलन केवल सत्र की घोषित अवधि से नहीं, बल्कि वास्तव में हुई बैठकों की संख्या से किया जाना चाहिए। कई बार सत्र 10 से 15 दिन के लिए बुलाया गया, लेकिन सदन की कार्यवाही कुछ ही दिन चली।
मप्र विधानसभा की पिछली बैठकें
वर्ष वास्तविक बैठकें स्थिति
- 2019 26 दिन 15वीं विधानसभा
- 2020 4 दिन कोरोना काल में सबसे कम
- 2021 20 दिन तीन सत्र
- 2022 15 दिन तीन सत्र
- 2023 18 दिन दो विधानसभाओं के कार्यकाल को मिलाकर
- 2024 16 दिन तीन सत्र
- 2025 22 दिन चार सत्र/बैठक अवधियां
2020 में सबसे कम चला सदन
- 2020 में सबसे खराब स्थिति रही। कोरोना महामारी के कारण विधानसभा की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। ADR की रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष सदन केवल चार दिन बैठा और कुल कार्यवाही महज 1.53 घंटे चली।
- 2019 में सदन की 26 बैठकें हुई थीं। 2021 में 20 और 2022 में 15 बैठकें हुईं। 2023 में भी 15वीं विधानसभा के कार्यकाल के दौरान 14 बैठकें ही हो पाईं। जुलाई 2024 का सत्र 14 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन केवल पांच दिन चला।
- 2024 में प्रदेश विधानसभा की कुल 16 बैठकें हुईं। PRS की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक देश की विधानसभाओं की औसत बैठकें 20 दिन थीं, जबकि मध्यप्रदेश विधानसभा 16 दिन ही बैठी।
- 2025 में विधानसभा की कुल 22 बैठकें हुईं। मार्च में 9, जुलाई-अगस्त में 8, दिसंबर के नियमित सत्र में 4 और 17 दिसंबर को एक विशेष बैठक हुई।
ADR रिपोर्ट में भी जताई गई थी चिंता
- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और मध्यप्रदेश इलेक्शन वॉच की अक्टूबर 2023 में जारी रिपोर्ट ने विधानसभा की घटती बैठकों पर चिंता जताई थी।
- रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2023 के बीच विधानसभा की औसत बैठकें लगभग 16 दिन सालाना रहीं। 15वीं विधानसभा के लिए कुल 126 बैठकें निर्धारित की गई थीं, लेकिन इनमें से 79 ही हो सकीं। 47 बैठकें रद्द कर दी गईं। यानी निर्धारित बैठकों में लगभग 37 प्रतिशत बैठकें नहीं हो पाईं।
16वीं विधानसभा का अब तक का सफर
- दिसंबर 2023 में गठित 16वीं विधानसभा का पहला सत्र 18 से 21 दिसंबर तक चला था। इसके बाद फरवरी 2024 में 6, जुलाई 2024 में 5 और दिसंबर 2024 में 5 बैठकें हुईं।
- 2025 में मार्च में 9, जुलाई-अगस्त में 8 और दिसंबर में 5 बैठकें हुईं। फरवरी 2026 के सत्र में 10 बैठकें दर्ज हैं। विधानसभा सचिवालय की सत्र अधिसूचना में दिसंबर 2026 का प्रस्तावित सत्र 16वीं विधानसभा का 12वां सत्र है।
पांच दिन के सत्र में कितने काम निपटेंगे?
- पांच दिन का यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। सरकार की प्राथमिकता अनुपूरक बजट और विधायी कामकाज निपटाने की रहेगी। विपक्ष खाद, बिजली, कानून-व्यवस्था, शराब कारोबार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है।
- सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पांच दिन का सत्र निर्धारित अवधि तक चलेगा और क्या जनहित से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो पाएगी? पिछले वर्षों का रिकॉर्ड बताता है कि सत्र की अवधि और वास्तविक कार्यवाही के दिनों में बड़ा अंतर रहा है। इसलिए इस बार भी निगाहें केवल सत्र की तारीखों पर नहीं, बल्कि सदन में होने वाली वास्तविक चर्चा, सवाल-जवाब और विधायी कामकाज पर रहेंगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
- सत्र: 7 से 11 दिसंबर 2026
- अवधि: 5 दिन
- विधानसभा: 16वीं
- सत्र क्रमांक: 12वां
- संभावित प्रमुख वित्तीय कार्य: द्वितीय अनुपूरक बजट 2026-27
- प्रमुख विपक्षी मुद्दे: खाद, बिजली, अवैध शराब, कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी
