-शहीद TI की पत्नी को SI की नौकरी, परिवार को एक करोड़
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल/देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब की तस्करी रोकने के दौरान खातेगांव थाना प्रभारी (टीआई) दिलीप पुरी की हत्या के मामले ने प्रदेश में शराब तस्करी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतक टीआई के परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को पुलिस विभाग में उप निरीक्षक (एसआई) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
इस मामले के बीच देवास में अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण और निगरानी में लापरवाही के आरोपों को लेकर जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया समेत तीन आबकारी अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इस कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी नीलेश कुमार पवार और आबकारी उपनिरीक्षक राजश्री खन्ना भी शामिल हैं।
अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने पहुंचे थे टीआई
घटना सोमवार, 2 नवंबर 2026 की तड़के देवास जिले के खातेगांव थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से इंदौर होते हुए गुजरात की तरफ अवैध शराब से भरा ट्रक जा रहा है। सूचना के आधार पर देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए पांच से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया था। इन टीमों में खातेगांव, कन्नौद और सतवास थाना क्षेत्रों के पुलिसकर्मी शामिल थे। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी भी पुलिस टीम के साथ कार्रवाई के लिए पहुंचे थे।
पुलिस टीम को हरदा-नेमावर मार्ग पर संदिग्ध वाहन मिला। बताया गया है कि जब टीआई दिलीप पुरी ने ट्रक चालक को वाहन से नीचे उतरने के लिए कहा, उसी दौरान चालक ने ट्रक आगे बढ़ा दिया। इस दौरान वाहन की चपेट में आने से टीआई गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ट्रक में मिली 1800 लीटर से अधिक अवैध शराब
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जब्त ट्रक में करीब 1800 लीटर अवैध शराब मिली। यह शराब 208 पेटियों में रखी गई थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इस तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
देवास पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। ट्रक और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर पड़ताल की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषित की एक करोड़ की सहायता
टीआई दिलीप पुरी की मौत की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान थाना प्रभारी का निधन अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को एसआई के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिला आबकारी अधिकारी समेत तीन पर कार्रवाई
देवास में टीआई की मौत से पहले चंदाना और बिंजाना गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला भी सामने आया था। इन घटनाओं के बाद आबकारी विभाग ने अपनी निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित किया था। निलंबित अधिकारियों में जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया, सहायक जिला आबकारी अधिकारी नीलेश कुमार पवार और आबकारी उपनिरीक्षक राजश्री खन्ना शामिल हैं।
विभागीय आदेशों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पाने, अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और अधीनस्थ अमले की गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखने का उल्लेख किया गया था। यह निलंबन चंदाना-बिंजाना शराब मामले में आबकारी विभाग की जवाबदेही तय करने के तहत किया गया था। इसे टीआई की मौत के बाद हुई अलग कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
शराब तस्करी के नेटवर्क की जांच पर निगाहें
देवास में लगातार सामने आ रहे अवैध शराब के मामलों ने जिले में आबकारी और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने के दौरान एक पुलिस अधिकारी की जान चली गई। अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब का परिवहन किसके संरक्षण में हो रहा था, इसके स्रोत और गंतव्य क्या थे तथा इस नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका है।
टीआई दिलीप पुरी की मौत के बाद सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और अनुकंपा नियुक्ति की घोषणा की गई है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों और संबंधित लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही किस तरह तय होती है।
