-वोट चोरी और SIR के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी गठबंधन INDI ब्लॉक ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ आयोजित महारैली में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता जुटे। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका रहा।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। गठबंधन ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
राहुल गांधी, खड़गे, ममता और अखिलेश समेत कई दिग्गज नेता हुए शामिल
रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा नेता एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा और वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य सहित कई प्रमुख विपक्षी चेहरे शामिल हुए।
विपक्षी नेताओं ने पहले मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मुलाकात की। इसके बाद नेता ओपन बस से मिंटो रोड पहुंचे और वहां से मार्च करते हुए रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। इस मार्च को गठबंधन ने अपनी एकजुटता और राजनीतिक शक्ति के प्रदर्शन के रूप में पेश किया।
SIR और चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
INDI ब्लॉक की इस रैली के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR रहा। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाताओं के नाम काटे जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जांच और जवाबदेही तय करने की बात कही। गठबंधन की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई गई।
रैली से एक दिन पहले विपक्षी दलों ने मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही आयोजित की थी। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस प्रतीकात्मक प्रक्रिया में विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह संवैधानिक महाभियोग की औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं थी।
10 लाख लोगों के जुटने का दावा, पुलिस का अनुमान 50 हजार
रैली को लेकर आयोजकों और पुलिस के अनुमान में बड़ा अंतर रहा। INDI ब्लॉक के आयोजकों ने करीब 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई थी, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों का था। रविवार को मैदान में विभिन्न विपक्षी दलों के हजारों समर्थक जुटे।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए। रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा जोन में बांटा गया था। 200 से अधिक CCTV कैमरों, ड्रोन और बॉडी-वॉर्न कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई। रैली और आसपास के इलाकों में 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कंपनियां तैनात की गईं।
विपक्ष की एकजुटता का संदेश, आगे भी जारी रहेगा अभियान
रामलीला मैदान की रैली को INDI ब्लॉक ने केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा बनाकर पेश किया। अलग-अलग राज्यों के विपक्षी नेताओं की मौजूदगी के जरिए गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर विपक्ष एक मंच पर है।
इस आयोजन का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि विपक्षी गठबंधन के सामने विभिन्न राज्यों में अपनी एकजुटता बनाए रखने और साझा मुद्दों पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की चुनौती है। अब देखना होगा कि रामलीला मैदान की इस रैली का असर राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी विमर्श पर कितना पड़ता है।
देश के अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचे कार्यकर्ता और समर्थक
रामलीला मैदान में आयोजित INDI ब्लॉक की महारैली को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप देने के लिए गठबंधन के घटक दलों ने देश के अलग-अलग राज्यों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली बुलाया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से पार्टी कार्यकर्ता राजधानी पहुंचे।
कई राज्यों से कार्यकर्ताओं के जत्थे बसों और ट्रेनों के जरिए दिल्ली पहुंचे। कुछ समर्थक शनिवार को ही राजधानी पहुंच गए थे, जबकि कई रविवार सुबह दिल्ली पहुंचे। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं ने भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के दिल्ली रवाना होने की जानकारी दी। दक्षिण भारत के पांच राज्यों से विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के कार्यकर्ताओं ने भी रैली में भागीदारी की।
रैली में विभिन्न राज्यों के झंडे, बैनर और नारेबाजी के जरिए विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक एकजुटता प्रदर्शित की। गठबंधन का प्रयास इस आयोजन को केवल दिल्ली तक सीमित न रखकर देशव्यापी जनआंदोलन का संदेश देने का रहा।
राज्यवार समर्थकों का अनुमानित आंकड़ा
- राज्य समर्थकों की संख्या आंकड़े का आधार
- हिमाचल प्रदेश 15,000 कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी का दावा
- उत्तर प्रदेश करीब 1 लाख यूपी कांग्रेस प्रतिनिधि का अनुमान
- तमिलनाडु संख्या उपलब्ध नहीं VCK कार्यकर्ताओं की भागीदारी
- केरल संख्या उपलब्ध नहीं VCK कार्यकर्ताओं की भागीदारी
- कर्नाटक संख्या उपलब्ध नहीं VCK और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी
- तेलंगाना संख्या उपलब्ध नहीं VCK कार्यकर्ताओं की भागीदारी
- आंध्र प्रदेश संख्या उपलब्ध नहीं VCK कार्यकर्ताओं की भागीदारी
कुल भीड़ को लेकर अलग-अलग दावे
- INDI ब्लॉक का दावा: करीब 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद।
- दिल्ली पुलिस का अनुमान: लगभग 50 हजार लोगों की व्यवस्था।
- पुलिस के अनुसार मैदान की क्षमता: खाली मैदान में लगभग 45-50 हजार, जबकि मंच, कुर्सियों और सुरक्षा व्यवस्था के बाद क्षमता घटकर 30-40 हजार रह जाती है।
