-मप्र में केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर चुनाव में बढ़ी हलचल
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मध्यप्रदेश की एक रिक्त राज्यसभा सीट के उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के सामने कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी ने नामांकन दाखिल कर मुकाबले को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, इस चुनाव में एक अन्य निर्दलीय दावेदार की उम्मीदवारी पर प्रस्तावकों की अनिवार्य संख्या को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैदराबाद निवासी कांते सयन्ना ने भी चुनाव लड़ने की तैयारी की है, लेकिन उनके सामने 10 विधायकों के प्रस्तावकों के हस्ताक्षर जुटाने की चुनौती है।
हरदीप पुरी के सामने राजकुमार लोहानी
भाजपा ने मध्यप्रदेश की रिक्त राज्यसभा सीट के उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी ने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।
इसके जवाब में कांग्रेस ने भोपाल के कारोबारी राजकुमार लोहानी को समर्थन दिया है। लोहानी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष नामांकन जमा किया। कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने। नामांकन के दौरान कांग्रेस के अन्य विधायक और नेताओं के साथ विवेक त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
किस वजह से रद्द हो सकता है लोहानी का पर्चा?
राजकुमार लोहानी के नामांकन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उन्होंने नामांकन के साथ अनिवार्य शपथपत्र (फॉर्म-26) दाखिल नहीं किया है। एक निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस कमी के कारण 3 नवंबर को होने वाली नामांकन पत्रों की जांच में उनका पर्चा खारिज हो सकता है।
लोहानी के नामांकन के दौरान कांग्रेस के छह विधायक मौजूद थे। कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा के मुताबिक, पार्टी के 10 विधायकों ने उन्हें समर्थन दिया है। ऐसे में प्रस्तावकों की संख्या और शपथपत्र की कमी दो अलग-अलग पहलू हैं। प्रस्तावकों का समर्थन होने से शपथपत्र की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती।
कांते सयन्ना की उम्मीदवारी पर भी संकट
तेलंगाना के हैदराबाद निवासी कांते सयन्ना ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। वह इससे पहले कई लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा चुनाव लड़ने का दावा कर चुके हैं। हालांकि, उनके नामांकन में भी आवश्यक प्रस्तावकों की कमी बताई गई है। निर्दलीय उम्मीदवार को राज्यसभा चुनाव में नामांकन के लिए कम से कम 10 निर्वाचित विधायकों के प्रस्तावकों की जरूरत होती है। इस शर्त को पूरा नहीं करने पर उनका नामांकन भी निरस्त हो सकता है।
भाजपा के पास 164 विधायकों का समर्थन
मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं और एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी से है। इस संख्याबल के कारण भाजपा प्रत्याशी हरदीप सिंह पुरी की स्थिति मजबूत है। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के सामने चुनावी जीत के लिए पर्याप्त प्रथम वरीयता के वोट जुटाना बड़ी चुनौती होगी।
कब होगा राज्यसभा उपचुनाव?
- निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार:
- चुनाव प्रक्रिया तारीख
- नामांकन की अंतिम तारीख 2 नवंबर 2026
- नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर 2026
- नाम वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर 2026
- मतदान 12 नवंबर 2026
- मतगणना 12 नवंबर 2026
- चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की तारीख 16 नवंबर 2026
मतदान की जरूरत पड़ने पर 12 नवंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे। इसके बाद शाम 5 बजे मतगणना होगी।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। भाजपा ने इस सीट के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल उत्तर प्रदेश से है, जो 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना निर्धारित है। ऐसे में मध्यप्रदेश की सीट से उनका निर्वाचन राजनीतिक और संसदीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अब 3 नवंबर की जांच पर टिकी निगाहें
मध्यप्रदेश के इस राज्यसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के सामने राजनीतिक चुनौती पेश करने के लिए राजकुमार लोहानी को समर्थन दिया है, लेकिन नामांकन के साथ जरूरी दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में उनका पर्चा खारिज हो सकता है। दूसरी तरफ कांते सयन्ना की उम्मीदवारी भी प्रस्तावकों की शर्त के कारण मुश्किल में बताई जा रही है। अब सबकी निगाहें 3 नवंबर को होने वाली नामांकन पत्रों की जांच पर हैं। इसी दिन स्पष्ट होगा कि हरदीप पुरी के सामने कौन-कौन चुनाव मैदान में बना रहता है और क्या कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में टिक पाएंगे।
