—ब्रह्मोस, अस्त्र मिसाइल और ईवीएम भारत से खरीदेगा इंडोनेशिया
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जकार्ता। एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत तीन देशों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इस यात्रा के पहले ही पड़ाव में चीन को झटका दे दिया है। भारत ने इंडोनेशिया के साथ विकास और तकनीक के क्षेत्र में कई अहम समझौते किए हैं। पीएम मोदी की इस यात्रा पर दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्र में 10 से ज्यादा समझौते हुए हैं। भारत रक्षा और समुद्री क्षेत्र में भी इंडोनेशिया का साझीदार बना है। दोनों देश रेयर अर्थ मटीरियल, स्टील, निकेल और परमानेंट मैग्नेट से जुड़े मामलों में भी ये समझौते हुए हैं। दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते सामरिक दृष्टि से कई अहम माने जा रहे हैं।
इंडोनेशिया का सबांग पोर्ट विकसित करेगा भारत
पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो ने विभिन्न विषयों पर मिलकर चर्चा की और 10 से ज्यादा इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें सबसे अहम यह है कि भारत मलक्का जलडमरू मार्ग (स्ट्रेट ऑफ मलक्का) के पास मौजूद इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट को विकसित करेगा. भारत की सामरिक दृष्टि से यह समझौता खास है, जो भारत के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से 100 मील की दूरी पर है।
सामरिक दृष्टि से भारत के लिए यह समझौता अहम
स्ट्रेट ऑफ मलक्का मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच मौजूद अहम जलमार्ग है, जिसके जरिए चीन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 80 फीसदी कच्चा तेल इसी मार्ग से लेकर जाता है। यह दुनिया के सबसे बिजी जलमार्गों में से एक है, जहां वैश्विक व्यापार का 22 फीसदी हिस्सा यहीं से होकर जाता है। समुद्री मार्ग से ढोए जाने वाले वैश्विक कच्चे तेल का 29 फीसदी हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर जाता है। यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से होते हुए प्रशांत महासागर से जोड़ता है। यह जलमार्ग एशिया के मैन्यूफैक्चरिंग हब को ऊर्जा संपन्न मध्य-एशिया से जोडऩे वाला अहम मार्ग है।
इंडोनेशिया को ईवीएम बनाने में मदद देगा भारत
इंडोनेशिया में होने वाले आम चुनावों के लिए भारत और इंडोनेशिया मिलकर काम करेंगे। भारत इंडोनेशिया के लिए खासतौर से ईवीएम बनाने में मदद करेगा। यह तकनीकी साझेदारी के रूप में दोनों देशों के बीच बड़ा कदम है।
रक्षा क्षेत्र में ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदेगा इंडोनेशिया
अपने रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में इंडोनेशिया भारत से भारत में बनी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र खरीदने का फैसला किया है। इंडोनेशिया ने इस मिसाइल की ताकत को भारत के पाकिस्तान पर छेड़े ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखी थी, इसके बाद उसने भी अपने रक्षा बेड़े में इस मिसाइल को शामिल करने का फैसला लिया है। इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल भंडार को बढ़ाने का फैसला किया है। उम्मीद है कि भारत उसे अतिरिक्त कोस्टल डिफेंस बैटरी (तटीय सुरक्षा प्रणालियां) देगा, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जकार्ता की समुद्री सुरक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी।
रेयर अर्थ मटीरियल प्रोजेक्ट
दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील सेक्टर की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने को लेकर डील हुई। भारत, इंडोनेशिया में इन रेयर अर्थ मटीरियल्स को निकालने में निवेश करेगा।
यूपीआई पेमेंट सिस्टम
भारतीय बाजारों में कैश की किल्लत को दूर करने वाली यूपीआई सर्विस अब इंडोनेशिया में भी अपना कमाल दिखाएगी, इससे दोनों देशों के बीच कारोबार और यात्राएं बहुत आसान हो जाएंगी। इसके अलावा कई अहम समझौतों को अंजाम दिया गया है।
भारत-इंडोनेशिया संबंध
भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से अत्यधिक प्रगाढ़ हैं। ये दो प्रमुख राष्ट्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सीमा साझा करते हैं। हाल ही में जुलाई 2026 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊर्जा मिली है, जहां रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और खाद्य सुरक्षा पर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।
रणनीतिक और रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इंडोनेशिया के आचे प्रांत से मात्र 160 किमी दूर हैं। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और इंडोनेशिया के ‘ग्लोबल मैरीटाइम फुलक्रम’ के बीच गहरा तालमेल है।
रक्षा सौदे
दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध तेजी से बढ़े हैं। इंडोनेशिया भारतीय अस्त्र (मिसाइल) और ब्रह्मोस मिसाइलों के अधिग्रहण को लेकर भारत के प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में उभरा है।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध द्विपक्षीय व्यापार
आसियान (ASEAN) क्षेत्र में इंडोनेशिया भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
आयात-निर्यात
भारत इंडोनेशिया से कोयला और कच्चे पाम तेल का सबसे बड़ा आयातक है। इसके विपरीत, भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों, कृषि वस्तुओं और स्टील उत्पादों का निर्यात करता है।
सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध साझा विरासत
दोनों देशों के संबंध दो हजार वर्षों से भी अधिक पुराने हैं। इंडोनेशिया की संस्कृति और भाषा में भारतीय संस्कृति की गहरी छाप है। उदाहरण के लिए, इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक ‘गरुड़’ है और उनकी राष्ट्रीय भाषा ( Bahasa Indonesia ) में हजारों संस्कृत शब्द शामिल हैं।
मंदिर परियोजना
भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रमुख परियोजनाएं शुरू की हैं।
